इस वेबिनार में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि मजबूत अवसंरचना—चाहे वह सड़क, रेल, बंदरगाह, डिजिटल नेटवर्क या ऊर्जा क्षेत्र हो—आर्थिक विकास की बुनियाद होती है। ऐसे में पूंजीगत निवेश को तेज करना और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना प्रमुख एजेंडा रहेगा। साथ ही, अवसंरचना विकास के लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण और नीतिगत स्थिरता पर भी चर्चा होगी।
बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में सुधार भी वेबिनार का अहम हिस्सा होगा। पिछले कुछ वर्षों में बैंकिंग प्रणाली को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, लेकिन बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल में नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे में वित्तीय क्षेत्र की संरचना को अधिक सक्षम, पारदर्शी और लचीला बनाना आवश्यक माना जा रहा है। पूंजी बाजारों को गहरा और व्यापक बनाने, निवेशकों के विश्वास को मजबूत करने तथा नवाचार को बढ़ावा देने पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
कर सुधारों का विषय भी इस चर्चा का महत्वपूर्ण पहलू है। सरकार का उद्देश्य कर प्रणाली को अधिक सरल, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाना है ताकि व्यवसाय करना आसान हो और आम लोगों के जीवनयापन की प्रक्रिया सुगम हो सके। टैक्स प्रशासन में तकनीक के उपयोग, अनुपालन को आसान बनाने और विवादों को कम करने जैसे मुद्दों पर भी सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे।
यह वेबिनार केवल एक औपचारिक संवाद नहीं, बल्कि एक सहभागी प्रक्रिया का हिस्सा है। इसमें उद्योग जगत, वित्तीय संस्थानों, बाजार प्रतिभागियों, नियामकों, सरकारी अधिकारियों और शिक्षाविदों को एक मंच पर लाया जाएगा। उद्देश्य यह है कि बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को समझा जाए और समाधान-उन्मुख रणनीति तैयार की जाए।
सरकार का प्रयास है कि बजट को केवल एक दस्तावेज़ के रूप में न देखा जाए, बल्कि उसे एक कार्ययोजना में बदला जाए, जिसके परिणाम स्पष्ट और मापनीय हों। पिछले अनुभवों से सीख लेते हुए और विभिन्न हितधारकों की प्रतिक्रिया के आधार पर नीतियों को बेहतर बनाना इस प्रक्रिया का केंद्रीय तत्व है।
कुल मिलाकर, यह वेबिनार “विकसित भारत” के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए प्रौद्योगिकी, सुधार और वित्त के समन्वित उपयोग पर केंद्रित रहेगा। इससे यह संदेश भी जाता है कि आर्थिक विकास केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि सरकार और निजी क्षेत्र के बीच साझेदारी से संभव है। आने वाले वित्त वर्ष में बजट घोषणाओं को गति देने और उन्हें परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।