तमिलनाडु चुनाव में ओवैसी का DMK गठबंधन को समर्थन, वोट की अपील
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असदुद्दीन ओवैसी ने AIMIM की ओर से तमिलनाडु चुनाव में DMK गठबंधन को समर्थन देते हुए मतदाताओं से 23 अप्रैल को वोट देने की अपील की।
वीडियो संदेश और सोशल मीडिया के जरिए ओवैसी ने एमके स्टालिन के नेतृत्व में सरकार की वापसी की उम्मीद जताई और खास सीटों पर समर्थन मांगा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, AIMIM का समर्थन अल्पसंख्यक वोटों को प्रभावित कर सकता है और चुनावी समीकरणों में बड़ा बदलाव ला सकता है।
Tamil Nadu Election 2026/ तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है। असदुद्दीन ओवैसी ने एक बड़ा राजनीतिक संकेत देते हुए AIMIM की ओर से DMK गठबंधन को समर्थन देने की घोषणा की है। उन्होंने मतदाताओं से 23 अप्रैल को होने वाले मतदान में इस गठबंधन के पक्ष में वोट डालने की अपील की है, जिससे चुनावी समीकरणों में नया मोड़ आ गया है।
ओवैसी ने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए तमिलनाडु के मतदाताओं को संबोधित किया। उन्होंने ‘सलाम अलैकुम’ और ‘वनक्कम’ के साथ अपनी बात शुरू करते हुए कहा कि AIMIM की ओर से वे सभी सम्मानित मतदाताओं से अनुरोध करते हैं कि वे 23 अप्रैल को एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाले DMK गठबंधन को अपना समर्थन दें। उन्होंने उम्मीद जताई कि जनता के आशीर्वाद से स्टालिन दोबारा सत्ता में वापसी करेंगे।
अपने संदेश में ओवैसी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी पहले ही DMK गठबंधन के समर्थन का ऐलान कर चुकी है। उन्होंने खासतौर पर वानियाम्बाड़ी सीट का जिक्र करते हुए वहां के मतदाताओं से गठबंधन उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने की अपील की।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी ओवैसी ने हिंदी में ट्वीट करते हुए मतदाताओं से आग्रह किया कि वे DMK गठबंधन के उम्मीदवारों को विजयी बनाएं। उन्होंने सभी मतदाताओं को धन्यवाद देते हुए शुभकामनाएं भी दीं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, AIMIM का यह समर्थन DMK गठबंधन के लिए अहम साबित हो सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां अल्पसंख्यक मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। वानियाम्बाड़ी समेत कई सीटों पर यह समर्थन चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकता है।
इस बीच, तमिलनाडु में चुनावी प्रचार अपने चरम पर है। सभी राजनीतिक दल मतदाताओं को लुभाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। ऐसे समय में ओवैसी का यह कदम DMK गठबंधन को अतिरिक्त मजबूती दे सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह समर्थन केवल राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक रणनीतिक निर्णय है, जिसका असर मतदान प्रतिशत और परिणाम दोनों पर पड़ सकता है। अब देखना होगा कि 23 अप्रैल को होने वाले मतदान में इसका कितना प्रभाव देखने को मिलता है।