सिविल सेवा दिवस पर उपराष्ट्रपति का संदेश, सुशासन और टेक्नोलॉजी पर जोर
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सिविल सेवा दिवस पर उपराष्ट्रपति ने प्रशासनिक अधिकारियों को सुशासन, पारदर्शिता और तकनीकी दक्षता अपनाकर विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में योगदान देने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री के विजन “सबका साथ, सबका विकास” को आधार बताते हुए गरीब कल्याण, महिला सशक्तिकरण और क्षेत्रीय विकास को प्रशासन की प्राथमिकता बताया गया।
प्रशासनिक सुधारों में AI, मशीन लर्निंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे iGOT कर्मयोगी के उपयोग से पारदर्शिता और सेवा वितरण को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
New Delhi/ नई दिल्ली में आयोजित 18वें सिविल सेवा दिवस के अवसर पर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए सुशासन, पारदर्शिता और तकनीकी दक्षता को भविष्य की प्रशासनिक रीढ़ बताया। उन्होंने अधिकारियों से नागरिक-केंद्रित शासन को मजबूत करने, ईमानदारी बनाए रखने और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में अपनी भूमिका को और प्रभावी बनाने का आह्वान किया। यह कार्यक्रम विज्ञान भवन में आयोजित हुआ, जिसमें कई वरिष्ठ अधिकारी और मंत्री मौजूद रहे।
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में स्वतंत्र भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के ऐतिहासिक संदेश को याद करते हुए कहा कि प्रशासनिक अधिकारी देश की “मजबूत नींव” हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 79 वर्षों में विभिन्न बैचों के अधिकारियों ने इस जिम्मेदारी को निभाते हुए राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले दशक में हुई उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के विजन को शासन का आधार बताया। उन्होंने कहा कि लगभग 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालना, 4 करोड़ से अधिक घरों का निर्माण और सीमावर्ती गांवों का विकास, प्रशासनिक दक्षता का प्रमाण है।
उपराष्ट्रपति ने “लखपति दीदी” और “नमो ड्रोन दीदी” जैसी योजनाओं का जिक्र करते हुए महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को विकास की नई दिशा बताया। उन्होंने कहा कि आकांक्षी जिला कार्यक्रम और ‘एक जिला एक उत्पाद’ जैसी पहलें क्षेत्रीय संतुलन को मजबूत कर रही हैं और सुनिश्चित कर रही हैं कि कोई भी क्षेत्र पीछे न रह जाए।
तकनीकी बदलावों पर जोर देते हुए उन्होंने अधिकारियों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और ब्लॉकचेन जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने iGOT Karmayogi जैसे प्लेटफॉर्म की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रशासनिक क्षमता को बढ़ाने और सेवा वितरण को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि कल्याणकारी योजनाओं को सावधानीपूर्वक लागू करना जरूरी है ताकि उनका लाभ सही लोगों तक पहुंचे। साथ ही उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और तकनीक के उपयोग से भ्रष्टाचार को कम किया जा सकता है।
नैतिक मूल्यों पर बल देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सच्चा नेतृत्व कठिन परिस्थितियों में भी ईमानदारी और निष्पक्षता बनाए रखने में निहित है। उन्होंने अधिकारियों से किसी भी प्रकार के अनुचित दबाव के आगे न झुकने और कानून के दायरे में रहकर निर्णय लेने का आह्वान किया।
महिला सशक्तिकरण पर बोलते हुए उन्होंने बताया कि सिविल सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी 2016 के लगभग 21 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में करीब 31 प्रतिशत हो गई है, जो सकारात्मक बदलाव का संकेत है।
अंत में उन्होंने अधिकारियों को याद दिलाया कि हर वर्ष लाखों उम्मीदवारों में से केवल कुछ ही इस सेवा में आते हैं, इसलिए यह एक विशेष जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों से अंतिम छोर तक सेवा पहुंचाने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।