आशा भोसले के निधन पर सोनू निगम बोले, शोक नहीं जश्न मनाएं
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आशा भोसले ने दशकों तक संगीत जगत में योगदान देकर कई पीढ़ियों को प्रभावित किया, उनका जीवन कलाकारों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
सोशल मीडिया पर साझा वीडियो में उन्होंने आशा भोसले के समर्पण, संघर्ष और संगीत के प्रति उनके जुनून से जुड़ी भावुक यादें साझा कीं।
Mumbai/ भारतीय संगीत जगत में शोक की लहर है, जहां दिग्गज गायिका Asha Bhosle के निधन की खबर ने करोड़ों प्रशंसकों को भावुक कर दिया है। उनके जाने के बाद संगीत प्रेमियों और कलाकारों के बीच श्रद्धांजलि का सिलसिला जारी है। इसी बीच प्रसिद्ध गायक Sonu Nigam का बयान चर्चा का केंद्र बन गया है।
सोनू निगम ने अपने बयान में कहा कि आशा भोसले के निधन पर दुख जरूर है, लेकिन इसे केवल शोक तक सीमित नहीं रखना चाहिए। उनका मानना है कि आशा भोसले ने अपने जीवन का हर पल संगीत को समर्पित किया और अंतिम समय तक सक्रिय रहीं। ऐसे में उनकी जिंदगी का जश्न मनाया जाना चाहिए।
उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए आशा भोसले के साथ बिताए गए खास पलों को याद किया। सोनू निगम ने बताया कि आशा जी बेहद समर्पित कलाकार थीं और कठिन परिस्थितियों में भी अपने काम के प्रति उनका जुनून कम नहीं हुआ। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि अमेरिका दौरे के दौरान आशा भोसले को एड़ी में दर्द था, तब उन्होंने उनके पैरों की मालिश कर उन्हें राहत पहुंचाई थी।
सोनू निगम ने उन्हें “एक युग का आखिरी सितारा” बताते हुए कहा कि वे सिर्फ एक गायिका नहीं थीं, बल्कि एक संस्था थीं। उन्होंने कई कलाकारों को प्रेरित किया और संगीत जगत को नई दिशा दी। उनके अनुसार, आशा भोसले का जीवन हर कलाकार के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
आशा भोसले का करियर बेहद शानदार रहा। उन्होंने 1940 के दशक में अपने संगीत सफर की शुरुआत की और हजारों गानों के जरिए कई पीढ़ियों को प्रभावित किया। 1948 में फिल्म ‘चुनरिया’ से हिंदी सिनेमा में कदम रखने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 90 वर्ष की उम्र में भी वे लाइव कॉन्सर्ट करती रहीं, जो उनके जुनून और समर्पण को दर्शाता है।
सोनू निगम के इस नजरिए ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि महान कलाकारों की विदाई को सिर्फ दुख से नहीं, बल्कि उनके योगदान के जश्न के रूप में भी देखा जाना चाहिए। आशा भोसले की विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।