MP राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस सतर्क
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मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर, विधायकों की बाड़ेबंदी और लगातार संपर्क के जरिए पार्टी एकजुटता बनाए रखने की कोशिश।
निर्मला सप्रे और मुकेश मल्होत्रा पर संशय, साथ ही 5-6 विधायकों के क्रॉस वोटिंग की आशंका से कांग्रेस की रणनीति और सियासी हलचल तेज।
Bhopal/ मध्य प्रदेश में 19 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। तीन सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव में जहां संख्याबल के आधार पर भारतीय जनता पार्टी को दो और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को एक सीट मिलना तय माना जा रहा है, वहीं क्रॉस वोटिंग की आशंका ने कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए रणनीति बनाने में जुट गई है।
राज्य की तीन सीटों पर वर्तमान में डॉ सुमेर सिंह सोलंकी, जॉर्ज कुरियन और दिग्विजय सिंह सांसद हैं, जिनका कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है। विधानसभा के मौजूदा गणित के अनुसार बीजेपी के पास 165 विधायक और कांग्रेस के पास 65 विधायक हैं, जिससे दो सीट बीजेपी और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाती दिख रही है।
हालांकि, हाल ही में हरियाणा, बिहार और ओडिशा में हुए राज्यसभा चुनावों के दौरान क्रॉस वोटिंग की घटनाओं ने कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी को डर है कि मध्य प्रदेश में भी कुछ विधायक पार्टी लाइन से हटकर मतदान कर सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इस आशंका के चलते कांग्रेस ने अपने विधायकों की “बाड़ेबंदी” यानी उन्हें एक सुरक्षित स्थान पर रखने की रणनीति पर विचार शुरू कर दिया है। पार्टी नेतृत्व लगातार विधायकों के संपर्क में है और उन्हें एकजुट रखने की कोशिश कर रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस कदम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चिंता दो विधायकों को लेकर बताई जा रही है। निर्मला सप्रे, जो बीते कुछ समय से बीजेपी के कार्यक्रमों में नजर आ रही हैं, उनके रुख को लेकर संशय बना हुआ है। वहीं मुकेश मल्होत्रा की सदस्यता का मामला अदालत में लंबित है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।
इसके अलावा पार्टी को आशंका है कि उसके 5 से 6 विधायक भी क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। हालांकि कांग्रेस नेता पीसी शर्मा का कहना है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और सभी विधायक पार्टी के निर्देशों का पालन करेंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि चुनाव में कोई अप्रत्याशित स्थिति नहीं बनेगी।
राज्यसभा चुनाव के गणित पर नजर डालें तो 230 सदस्यीय विधानसभा में एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों का समर्थन जरूरी होता है। इस लिहाज से बीजेपी आसानी से दो सीटें जीत सकती है, जबकि कांग्रेस के लिए एक सीट सुरक्षित मानी जा रही है। लेकिन यदि क्रॉस वोटिंग होती है या कुछ विधायक अनुपस्थित रहते हैं, तो समीकरण बदल सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में परिणाम से ज्यादा दिलचस्पी इस बात को लेकर है कि क्या कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रख पाती है या नहीं। आने वाले दिनों में पार्टी की रणनीति और विधायकों की स्थिति चुनावी नतीजों पर बड़ा असर डाल सकती है।