अंबिकापुर में राशन देरी पर बवाल, ग्रामीणों ने संचालक को बनाया बंधक

Fri 01-May-2026,12:28 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

अंबिकापुर में राशन देरी पर बवाल, ग्रामीणों ने संचालक को बनाया बंधक Ambikapur-Ration-Delay-Protest-Villagers-Detain-Operator
  • अंबिकापुर के रजपुरीकला गांव में महीनों से राशन नहीं मिलने से नाराज़ ग्रामीणों ने उचित मूल्य दुकान में हंगामा कर संचालक को बंधक बना लिया।

  • ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद राशन वितरण में सुधार नहीं हुआ, जिससे लगातार असंतोष और गुस्सा बढ़ता गया।

  • पुलिस के हस्तक्षेप और आश्वासन के बाद स्थिति नियंत्रित हुई और बंधक बनाए गए संचालक को सुरक्षित रिहा कर दिया गया।

Chhattisgarh / Ambikapur :

Ambikapur/ छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जिले में राशन वितरण में लगातार हो रही देरी ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। Ambikapur के लखनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रजपुरीकला में गुरुवार देर रात ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। लंबे समय से राशन नहीं मिलने से नाराज़ लोगों ने उचित मूल्य दुकान में हंगामा किया और सोसायटी संचालक को बंधक बना लिया। यह घटना प्रशासनिक व्यवस्था और सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर सवाल खड़े करती है।

ग्रामीणों के अनुसार, उन्हें पिछले कई महीनों से नियमित रूप से राशन नहीं मिल रहा था। कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में आक्रोश लगातार बढ़ता गया।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि वे पिछले तीन दिनों से सुबह 3 बजे से ही दुकान के बाहर लंबी कतार में खड़े हो रहे थे। बावजूद इसके, उन्हें राशन नहीं मिला और खाली हाथ लौटना पड़ा। इस स्थिति ने ग्रामीणों के धैर्य को पूरी तरह खत्म कर दिया।

महीने के अंतिम दिन भी जब राशन वितरण नहीं हुआ, तो ग्रामीणों का गुस्सा चरम पर पहुंच गया। विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने सोसायटी संचालक हरविंद्र प्रसाद राजवाड़े को बंधक बना लिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

संचालक ने अपनी सफाई में कहा कि राशन का समय पर आबंटन नहीं होने के कारण वितरण प्रभावित हुआ है। उन्होंने इस समस्या के लिए उच्च स्तर पर लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया और खुद को निर्दोष बताया।

घटना की सूचना मिलते ही लखनपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने ग्रामीणों को समझाइश दी और जल्द समस्या के समाधान का आश्वासन दिया। इसके बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई।

पुलिस के हस्तक्षेप और कार्रवाई के भरोसे के बाद ग्रामीणों ने संचालक को सुरक्षित रिहा कर दिया। हालांकि, इस घटना ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की खामियों को उजागर कर दिया है।