तमिलनाडु चुनाव: DMK-कांग्रेस सीट शेयरिंग तय, कांग्रेस 28 सीटों पर लड़ेगी विधानसभा चुनाव
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डीएमके और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग पर बनी सहमति.
कांग्रेस तमिलनाडु में 28 विधानसभा सीटों पर लड़ेगी चुनाव.
गठबंधन में कांग्रेस को एक राज्यसभा सीट देने का भी वादा.
Tamilnadu / तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर चल रही लंबी बातचीत आखिरकार खत्म हो गई है। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर औपचारिक सहमति बन गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री तथा डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन के बीच हुई बातचीत के बाद इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया।
बुधवार सुबह दोनों नेताओं के बीच फोन पर बातचीत हुई, जिसके बाद कई दिनों से चल रहा सीट शेयरिंग का गतिरोध खत्म हो गया। इस समझौते के तहत कांग्रेस तमिलनाडु की 28 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। साथ ही डीएमके ने कांग्रेस को एक राज्यसभा सीट देने का भी वादा किया है।
सीटों को लेकर लंबे समय से चल रहा था विवाद
सीट शेयरिंग को लेकर डीएमके और कांग्रेस के बीच पिछले कई दिनों से कशमकश की स्थिति बनी हुई थी। कांग्रेस इस बार राज्य में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए 35 विधानसभा सीटों और दो राज्यसभा सीटों की मांग कर रही थी।
वहीं डीएमके की ओर से शुरुआत में साफ कर दिया गया था कि वह कांग्रेस को 25 विधानसभा सीटों और एक राज्यसभा सीट से ज्यादा देने को तैयार नहीं है। डीएमके नेतृत्व का मानना था कि गठबंधन के अन्य दलों को भी ध्यान में रखते हुए सीटों का संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
इसी वजह से दोनों दलों के बीच बातचीत के कई दौर हुए, लेकिन लंबे समय तक कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका।
पी. चिदंबरम को सौंपी गई थी बातचीत की जिम्मेदारी
सीट शेयरिंग के इस विवाद को सुलझाने के लिए कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम को जिम्मेदारी दी थी। चिदंबरम ने डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन और पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं से बातचीत की।
हालांकि उनकी कोशिशों के बावजूद शुरुआत में कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। इसके बाद मामला कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा। अंततः कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने खुद स्टालिन से सीधे बातचीत कर इस मुद्दे को सुलझाया।
बताया जा रहा है कि होली के मौके पर हुई इस बातचीत के दौरान दोनों नेताओं के बीच सीटों को लेकर अंतिम सहमति बन गई।
पिछले चुनाव का अनुभव भी बना आधार
पिछले विधानसभा चुनाव में भी डीएमके और कांग्रेस गठबंधन में चुनाव लड़े थे। उस समय डीएमके ने कांग्रेस को 25 सीटें दी थीं। इनमें से कांग्रेस 18 सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रही थी।
इस सफलता के आधार पर कांग्रेस इस बार ज्यादा सीटों की मांग कर रही थी। पार्टी का मानना था कि पिछले प्रदर्शन को देखते हुए उसे ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए।
हालांकि डीएमके ने अपने सहयोगी दलों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए सीटों की संख्या सीमित रखने का फैसला किया।
गठबंधन ने चुनावी रणनीति साफ की
डीएमके और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग का मुद्दा सुलझने के साथ ही तमिलनाडु की चुनावी राजनीति में सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिति काफी हद तक साफ हो गई है। अब दोनों दल मिलकर चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट जाएंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता विपक्ष के मुकाबले सत्तारूढ़ गठबंधन को मजबूती दे सकता है।
डीएमके और कांग्रेस जल्द ही एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस समझौते की आधिकारिक घोषणा करेंगे। इसके बाद उम्मीदवारों के चयन और चुनाव प्रचार की रणनीति पर तेजी से काम शुरू होने की उम्मीद है।
तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों पर होने वाला यह चुनाव राज्य की राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, जहां सभी दल अपनी-अपनी ताकत दिखाने की तैयारी में जुटे हुए हैं।