हनुमान जयंती 2026: महाभारत में हनुमान की अनसुनी भूमिका
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हनुमान जयंती पर श्रद्धालुओं में भक्ति का माहौल, रामायण के साथ महाभारत में हनुमान जी की भूमिका को लेकर लोगों में बढ़ी जिज्ञासा।
चिरंजीवी हनुमान की अवधारणा धार्मिक आस्था को मजबूत करती है, जिससे भक्तों में विश्वास और आध्यात्मिक जुड़ाव और अधिक गहरा होता है।
Raipur/ देशभर में हनुमान जयंती श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है। यह पावन पर्व चैत्र पूर्णिमा को भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और भंडारे का आयोजन हो रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जी भगवान शिव के रुद्रावतार हैं और उन्होंने अपना जीवन भगवान राम की सेवा में समर्पित किया। लेकिन उनकी महिमा केवल रामायण तक सीमित नहीं, बल्कि महाभारत में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
हनुमान जयंती के अवसर पर भक्त न केवल उनकी भक्ति और शक्ति को याद करते हैं, बल्कि उनसे जुड़ी प्रेरणादायक कथाओं को भी स्मरण करते हैं। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि हनुमान जी ने हर युग में धर्म और सत्य की रक्षा के लिए अपना योगदान दिया है।
महाभारत काल में भी हनुमान जी की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय है। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, अर्जुन को अपनी धनुर्विद्या पर गर्व हो गया था। तब श्रीकृष्ण ने उन्हें विनम्रता का पाठ सिखाने के लिए हनुमान जी से मिलवाया। हनुमान जी ने अर्जुन को चुनौती दी कि वे बाणों से पुल बनाएं, लेकिन अर्जुन असफल रहे। इस घटना के बाद उनका अहंकार टूट गया।
इसके पश्चात हनुमान जी ने अर्जुन के रथ पर ध्वज (कपिध्वज) के रूप में रहने का वचन दिया। मान्यता है कि महाभारत युद्ध के दौरान हनुमान जी ने अर्जुन के रथ की रक्षा की और उन्हें कई संकटों से बचाया।
एक अन्य कथा में भीम और हनुमान जी की मुलाकात का वर्णन मिलता है। वनवास के दौरान भीम जब सौगंधिका फूल लेने गए, तब उन्हें एक वृद्ध वानर मिला जिसकी पूंछ रास्ते में थी। भीम अपनी पूरी ताकत लगाने के बावजूद पूंछ नहीं हटा सके। बाद में वह वानर हनुमान जी ही निकले। इस घटना ने भीम का घमंड तोड़ दिया और उन्हें विनम्रता का महत्व समझाया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी चिरंजीवी हैं, यानी वे अमर हैं और हर युग में मौजूद रहते हैं। यही कारण है कि वे त्रेतायुग और द्वापर युग दोनों में सक्रिय रहे।
हनुमान जयंती का यह पर्व हमें यह संदेश देता है कि शक्ति के साथ विनम्रता और भक्ति का होना भी आवश्यक है। चाहे अर्जुन हों या भीम, हनुमान जी ने हर किसी को अहंकार त्यागकर धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।