कोयला घोटाले में ED का I-PAC पर शिकंजा, कई शहरों में छापे से सियासत गरम
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ED ने कोयला तस्करी मामले में I-PAC के खिलाफ कई शहरों में छापेमारी की, हवाला नेटवर्क और राजनीतिक फंडिंग कनेक्शन की जांच तेज।
बेंगलुरु में को-फाउंडर ऋषि राज सिंह के ठिकानों पर रेड, डिजिटल साक्ष्य और दस्तावेजों से बड़े खुलासे की संभावना जताई जा रही है।
Kolkata/ पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित कोयला तस्करी मामले में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई तेज हो गई है। जांच एजेंसी ने देशभर में कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर मामले को नया मोड़ दे दिया है।
बेंगलुरु में की गई छापेमारी विशेष रूप से अहम मानी जा रही है, जहां I-PAC के को-फाउंडर Rishi Raj Singh के ठिकानों पर ED की टीम पहुंची। सूत्रों के अनुसार, एजेंसी को ऐसे दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनसे कोयला तस्करी से जुड़े हवाला नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
ED का आरोप है कि इस अवैध कारोबार से अर्जित करोड़ों रुपये हवाला के जरिए विभिन्न कंपनियों और संस्थाओं तक पहुंचाए गए। जांच में “शाकंभरी ग्रुप ऑफ कंपनीज” का नाम भी सामने आया है, जहां इस धन के पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि क्या इस कथित काले धन का इस्तेमाल चुनावी रणनीति, राजनीतिक गतिविधियों या कैंपेन मैनेजमेंट में किया गया। यदि ऐसा साबित होता है, तो यह मामला राजनीतिक फंडिंग और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
यह पहला मौका नहीं है जब I-PAC जांच के दायरे में आया हो। इससे पहले कोलकाता में भी इसके दफ्तर और प्रमुख Pratik Jain के निवास पर छापेमारी की जा चुकी है। उस दौरान भी हवाला फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोप सामने आए थे।
इस कार्रवाई के बाद सियासी माहौल भी गरमा गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने पहले की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे केंद्र सरकार की साजिश बताया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि यह कदम केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के इशारे पर उठाया गया है, ताकि विपक्ष की रणनीति को प्रभावित किया जा सके।
फिलहाल ED की टीमें जब्त दस्तावेजों और डिजिटल डेटा की गहन जांच में जुटी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
दिल्ली से लेकर दक्षिण भारत के शहरों तक फैली इस कार्रवाई ने साफ संकेत दिया है कि एजेंसी इस केस को गंभीरता से ले रही है। कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग का यह मामला अब केवल आर्थिक अपराध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर देश की राजनीतिक प्रक्रिया और चुनावी सिस्टम पर भी पड़ सकता है।