मिडिल ईस्ट जंग का असर: इंडिगो ने फ्लाइट टिकट पर ₹425–₹2300 तक फ्यूल सरचार्ज बढ़ाया
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Indigo Fuel Surcharge News
जेट फ्यूल महंगा होने से इंडिगो ने टिकट पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ाया।
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर ₹425–₹2300 तक अतिरिक्त चार्ज।
मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता।
Delhi / मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब केवल अंतरराष्ट्रीय राजनीति या तेल बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर भी पड़ने लगा है। खासकर हवाई यात्रियों को अब इस संकट का आर्थिक असर झेलना पड़ रहा है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार में भारी अस्थिरता पैदा हो गई है, जिससे जेट फ्यूल यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में तेज उछाल आया है।
इसी बढ़ती लागत को देखते हुए देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज लगाने का फैसला किया है। कंपनी के अनुसार अब यात्रियों को फ्लाइट टिकट पर ₹425 से ₹2300 तक अतिरिक्त चार्ज देना होगा। यह नया नियम 14 मार्च 2026 की रात 12 बजे के बाद की बुकिंग पर लागू किया गया है। यानी इस तारीख के बाद टिकट बुक करने वाले यात्रियों को पहले की तुलना में अधिक किराया देना पड़ेगा।
इंडिगो ने स्पष्ट किया है कि टिकटों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की सबसे बड़ी वजह जेट फ्यूल की कीमतों में तेज वृद्धि है। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे जेट फ्यूल की कीमतें लगभग 85 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। एयरलाइन का कहना है कि लागत में इतनी तेजी से बढ़ोतरी के बावजूद यात्रियों पर अचानक ज्यादा बोझ न पड़े, इसलिए फिलहाल सीमित फ्यूल सरचार्ज लगाया गया है। कंपनी ने यह भी कहा है कि बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर भविष्य में इन शुल्कों में बदलाव किया जा सकता है।
दूरी और रूट के आधार पर अलग-अलग सरचार्ज तय किए गए हैं। घरेलू उड़ानों और भारतीय उपमहाद्वीप के कुछ रूट्स पर यह शुल्क लगभग ₹425 प्रति सेक्टर होगा, जबकि मिडिल ईस्ट, दक्षिण-पूर्व एशिया और चीन जैसे रूट्स पर यह बढ़कर ₹900 से ₹1800 तक हो सकता है। यूरोप जैसे लंबी दूरी के रूट्स पर यह शुल्क ₹2300 प्रति सेक्टर तक पहुंच सकता है। यह अतिरिक्त राशि टिकट की कुल कीमत में सीधे जोड़ दी जाएगी।
इंडिगो से पहले एयर इंडिया भी टिकटों के दाम बढ़ा चुकी है। एयर इंडिया ने 12 मार्च 2026 से घरेलू उड़ानों पर ₹399 का फ्यूल सरचार्ज लागू किया था और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किराए में लगभग 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई थी। एयरलाइन कंपनियों का कहना है कि जेट फ्यूल उनके कुल संचालन खर्च का लगभग 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा होता है, इसलिए ईंधन की कीमत बढ़ने का सीधा असर टिकट कीमतों पर पड़ता है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने तेल आपूर्ति श्रृंखला को भी प्रभावित किया है। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्गों में बढ़ती अनिश्चितता ने वैश्विक बाजार में चिंता बढ़ा दी है। यह मार्ग दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। यदि यहां आपूर्ति बाधित होती है, तो तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है, जबकि जेट फ्यूल की कीमतें कई जगह लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। इसका असर वैश्विक विमानन उद्योग पर भी दिखाई दे रहा है। कई एयरलाइंस ने कुछ रूट्स पर उड़ानें कम कर दी हैं और हजारों उड़ानें रद्द भी हुई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है और तेल की कीमतों में गिरावट नहीं आती, तो आने वाले महीनों में हवाई यात्रा और महंगी हो सकती है। ऐसे में यात्रियों को भविष्य में टिकटों के लिए पहले से अधिक भुगतान करना पड़ सकता है।