New Delhi/ राष्ट्रीय स्तर पर महिला मुद्दों पर जिम्मेदार और संवेदनशील पत्रकारिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय ‘मीडिया मंथन’ सम्मेलन का नई दिल्ली में सफल समापन हुआ। राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा सुषमा स्वराज भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से आए पत्रकारों ने भाग लिया। सम्मेलन में जेंडर-संवेदनशील रिपोर्टिंग, मीडिया की भूमिका और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा की गई।
इस दो दिवसीय राष्ट्रीय पत्रकार सम्मेलन में 20 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्रिंट और डिजिटल मीडिया के प्रतिनिधियों ने भागीदारी की। विशेष रूप से छत्तीसगढ़ से पांच महिला पत्रकारों को आमंत्रित किया गया, जिनमें हरिभूमि मीडिया ग्रुप की सहभागिता उल्लेखनीय रही। रायपुर से श्वेता शर्मा और भिलाई से संगीता मिश्रा ने कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए आयोग की अध्यक्ष विजया राहटकर ने कहा कि जेंडर-संवेदनशील रिपोर्टिंग केवल खबरों का प्रस्तुतीकरण नहीं, बल्कि महिलाओं की गरिमा, न्याय और सच्चाई के प्रति प्रतिबद्धता है। उन्होंने मीडिया संस्थानों से अपील की कि महिलाओं से जुड़े विषयों को सनसनीखेज बनाने से बचते हुए संवेदनशील और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाया जाए।
सम्मेलन के दौरान ‘ट्रू साइबर सखी’ और ‘रिपोर्टिंग विद डिग्निटी’ जैसे दो महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन किया गया। ये प्रकाशन पत्रकारों को डिजिटल सुरक्षा और नैतिक रिपोर्टिंग के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। इन पहलों का उद्देश्य मीडिया में जिम्मेदारी और जागरूकता को मजबूत करना है।
कार्यक्रम में कई अहम सत्र आयोजित किए गए, जिनमें मीडिया कानून, नैतिकता और महिला अधिकारों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. पिंकी आनंद ने मीडिया कानून पर प्रकाश डाला, जबकि मनमोहन वर्मा ने महिलाओं से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। वहीं, भारतीय जनसंचार संस्थान की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़ ने मीडिया में महिलाओं की गरिमामय प्रस्तुति पर जोर दिया।
सम्मेलन के अंत में प्रतिभागियों को समाज में सकारात्मक बदलाव के वाहक बनने और महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया गया। यह आयोजन पत्रकारिता के क्षेत्र में नैतिकता और संवेदनशीलता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।