वजन घटाने की दवाओं पर सख्ती: GLP-1 की अवैध बिक्री और प्रचार पर बड़ा एक्शन

Tue 24-Mar-2026,11:54 AM IST +05:30

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वजन घटाने की दवाओं पर सख्ती: GLP-1 की अवैध बिक्री और प्रचार पर बड़ा एक्शन GLP1-Weight-Loss-Drugs-India-Crackdown-Illegal-Sales
  • जीएलपी-1 दवाओं की अनधिकृत बिक्री पर सख्ती से मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दवा बाजार में पारदर्शिता लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया।

  • बिना चिकित्सकीय सलाह वजन घटाने वाली दवाओं के उपयोग से गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को रोकने के लिए नियामक ने कड़े निर्देश जारी किए।

Delhi / Delhi :

Delhi/ भारत में तेजी से बढ़ती वजन घटाने वाली दवाओं की मांग के बीच अब नियामक सख्ती भी बढ़ा दी गई है। औषधि नियंत्रक ने जीएलपी-1 आधारित दवाओं की अनियंत्रित बिक्री और भ्रामक प्रचार को लेकर गंभीर चिंता जताई है। हाल के दिनों में इन दवाओं के बढ़ते उपयोग और बिना चिकित्सकीय निगरानी के सेवन से स्वास्थ्य जोखिमों की आशंका बढ़ी है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब देशभर में सख्त निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई शुरू की गई है।

भारत के औषधि नियंत्रक ने वजन घटाने वाली जीएलपी-1 दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता और नैतिकता सुनिश्चित करने के लिए अपनी नियामक निगरानी को तेज कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, बाजार में इन दवाओं के नए जेनेरिक वेरिएंट आने के बाद इनकी उपलब्धता खुदरा दुकानों, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और हेल्थ क्लीनिकों में तेजी से बढ़ी है, जिससे दुरुपयोग का खतरा भी बढ़ गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जीएलपी-1 दवाएं मूल रूप से मधुमेह और कुछ विशेष चिकित्सा स्थितियों के इलाज के लिए विकसित की गई थीं, लेकिन हाल के समय में इनका उपयोग वजन घटाने के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। बिना डॉक्टर की निगरानी के इनका सेवन गंभीर दुष्प्रभाव जैसे पाचन संबंधी समस्याएं, हार्मोनल असंतुलन और अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं को जन्म दे सकता है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 10 मार्च 2026 को सभी दवा निर्माताओं को एक व्यापक एडवाइजरी जारी की गई। इसमें स्पष्ट निर्देश दिए गए कि किसी भी प्रकार का भ्रामक विज्ञापन, अप्रत्यक्ष प्रचार या ऑफ-लेबल उपयोग को बढ़ावा देने वाली गतिविधियां पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगी। नियामक ने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले प्रचार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

प्रवर्तन स्तर पर भी सख्ती बढ़ाई गई है। देशभर में 49 संस्थाओं—जिनमें ऑनलाइन फार्मेसी, थोक विक्रेता, खुदरा विक्रेता और वजन घटाने वाले क्लीनिक शामिल हैं—का निरीक्षण और ऑडिट किया गया। इन जांचों का उद्देश्य अनधिकृत बिक्री, गलत प्रिस्क्रिप्शन प्रथाओं और भ्रामक मार्केटिंग के मामलों की पहचान करना था। जांच के दौरान कई अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद संबंधित संस्थाओं को नोटिस जारी किए गए हैं।

औषधि नियंत्रक ने साफ किया है कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे इन दवाओं का उपयोग केवल योग्य चिकित्सकों की देखरेख में ही करें। भारत में इन दवाओं के उपयोग की अनुमति केवल एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञों के निर्देश पर दी गई है, जबकि कुछ मामलों में कार्डियोलॉजिस्ट की निगरानी भी आवश्यक होती है।

आने वाले समय में निगरानी और सख्त की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ लाइसेंस रद्द करने, जुर्माना लगाने और कानूनी कार्रवाई जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे। यह पहल न केवल दवा बाजार में पारदर्शिता बढ़ाएगी, बल्कि मरीजों की सुरक्षा को भी सुनिश्चित करेगी।