भारत-कोरिया साझेदारी से शिपबिल्डिंग सेक्टर को बढ़ावा, कौशल विकास पर जोर

Fri 03-Apr-2026,06:28 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

भारत-कोरिया साझेदारी से शिपबिल्डिंग सेक्टर को बढ़ावा, कौशल विकास पर जोर India-Korea-Shipbuilding-Skill-Development-2026
  • भारत और कोरिया के सहयोग से शिपबिल्डिंग सेक्टर में कौशल विकास, कार्यबल विश्लेषण और भविष्य के लिए रणनीतिक रोडमैप तैयार किया जाएगा।

  • नई परियोजना के तहत प्रशिक्षण, रिसर्च और वर्कशॉप के जरिए युवाओं को आधुनिक समुद्री तकनीकों में दक्ष बनाया जाएगा।

Delhi / New Delhi :

New Delhi/ भारत की समुद्री ताकत को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ पोर्ट्स, शिपिंग एंड वाटरवेज (MoPSW) ने 2 अप्रैल 2026 को Korea International Cooperation Agency (KOICA) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह परियोजना भारतीय शिपबिल्डिंग और मरीन सेक्टर में कौशल विकास को नई दिशा देगी और देश को वैश्विक शिपबिल्डिंग हब बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगी।

भारत के समुद्री क्षेत्र को आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से यह साझेदारी ‘समुद्री अमृत काल विजन 2047’ के तहत एक रणनीतिक पहल मानी जा रही है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य शिपबिल्डिंग और मरीन इंजीनियरिंग सेक्टर के लिए कुशल और पेशेवर मानव संसाधन तैयार करना है, जिससे उद्योग को दीर्घकालिक मजबूती मिल सके।

इस समझौते के तहत Korea Research Institute for Vocational Education and Training और अन्य संस्थानों के सहयोग से भारत के शिपबिल्डिंग सेक्टर का गहन अध्ययन किया जाएगा। इसमें कार्यबल की मौजूदा स्थिति, कौशल की कमी और भविष्य की जरूरतों का विश्लेषण किया जाएगा। इसके आधार पर एक व्यापक मास्टर प्लान और कार्यान्वयन योग्य रोडमैप तैयार किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री Sarbananda Sonowal ने इस साझेदारी को भारत की समुद्री यात्रा में एक निर्णायक कदम बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत अपने समुद्री क्षेत्र को आर्थिक विकास और रणनीतिक शक्ति का प्रमुख स्तंभ बना रहा है। यह पहल एक नई पीढ़ी के तकनीकी रूप से सक्षम और प्रशिक्षित समुद्री पेशेवरों को तैयार करेगी।

परियोजना के अंतर्गत भारत और दक्षिण कोरिया में कई कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, जिनमें उद्योग विशेषज्ञ, नीति निर्माता और शैक्षणिक संस्थान शामिल होंगे। इन कार्यशालाओं के माध्यम से वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान और सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

इसके अलावा, ‘शिपबिल्डिंग वर्कफोर्स डेवलपमेंट एंड टेक्नोलॉजी कोऑपरेशन सेंटर’ की स्थापना पर भी चर्चा अंतिम चरण में है। यह केंद्र व्यावसायिक प्रशिक्षण, तकनीकी कौशल विकास और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देगा।

इस पहल से भारत के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और देश की शिपबिल्डिंग क्षमता में वृद्धि होगी। साथ ही, यह भारत को वैश्विक समुद्री सेवाओं और शिपबिल्डिंग उद्योग में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।

कुल मिलाकर, यह साझेदारी न केवल कौशल विकास को बढ़ावा देगी, बल्कि भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का मार्ग भी प्रशस्त करेगी।