भारतीय नौसेना को मिला दूनागिरी युद्धपोत, प्रोजेक्ट 17ए से बढ़ी समुद्री ताकत
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Indian-Navy-Dunagiri-Frigate-P17A
भारतीय नौसेना को प्रोजेक्ट 17ए के तहत दूनागिरी युद्धपोत मिला, जिससे समुद्री सुरक्षा और युद्ध क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी।
गार्डन रीच शिपबिल्डिंग एंड इंजीनियर्स लिमिटेड में निर्मित इस फ्रिगेट में स्टील्थ तकनीक, ब्रह्मोस मिसाइल और अत्याधुनिक सेंसर शामिल हैं।
Delhi/ भारतीय नौसेना की ताकत में एक और बड़ा इजाफा करते हुए 30 मार्च 2026 को नीलगिरी श्रेणी (प्रोजेक्ट 17ए) का पांचवां युद्धपोत ‘दूनागिरी’ शामिल किया गया। इस अत्याधुनिक फ्रिगेट का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डिंग एंड इंजीनियर्स लिमिटेड, कोलकाता में किया गया है। यह उपलब्धि भारत की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
दूनागिरी, प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित बहु-मिशन फ्रिगेट है, जिसे समुद्री सुरक्षा की वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। यह आधुनिक स्टील्थ तकनीक, उच्च मारक क्षमता और उन्नत स्वचालन प्रणाली से लैस है, जो इसे नौसेना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है। यह युद्धपोत पूर्व में सेवा दे चुके आईएनएस दूनागिरी का आधुनिक संस्करण है, जिसने 1977 से 2010 तक देश की सेवा की थी। नए दूनागिरी में तकनीकी रूप से बड़े सुधार किए गए हैं, जो इसे अधिक सक्षम और प्रभावी बनाते हैं।
युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किए गए इस फ्रिगेट में ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली, एमएफस्टार रडार और एमआरएसएएम कॉम्प्लेक्स जैसे अत्याधुनिक हथियार और सेंसर लगाए गए हैं। इसके अलावा इसमें पनडुब्बी रोधी युद्ध के लिए रॉकेट और टॉरपीडो भी शामिल हैं।
यह जहाज संयुक्त डीजल या गैस (CODAG) प्रणोदन प्रणाली से संचालित होता है, जिससे यह उच्च गति और बेहतर संचालन क्षमता प्राप्त करता है। इसके साथ ही इसमें एकीकृत प्लेटफॉर्म प्रबंधन प्रणाली (IPMS) भी मौजूद है, जो जहाज के संचालन को और अधिक प्रभावी बनाती है।
दूनागिरी की एक खास बात इसका 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशीकरण है। इस परियोजना में 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) जुड़े हुए हैं, जिससे हजारों लोगों को रोजगार मिला है। पिछले युद्धपोतों के अनुभव के आधार पर दूनागिरी के निर्माण समय को भी कम किया गया है, जो भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता को दर्शाता है। इस युद्धपोत की तैनाती से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति और समुद्री शक्ति को और मजबूती मिलेगी।