भारतीय नौसेना कितनी बदलेगी? राजनाथ सिंह ने कमांडर्स सम्मेलन में क्या कहा?
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Navy Commanders Conference
राजनाथ सिंह ने समुद्री निगरानी और नौसेना की परिचालन क्षमता मजबूत करने पर जोर दिया।
2026 में 18 युद्धपोत शामिल या कमीशन करने की योजना का उल्लेख हुआ।
स्वदेशी जहाज निर्माण, महिला सशक्तिकरण और समुद्री सहयोग पर भी जोर दिया गया।
New Delhi / नई दिल्ली में भारतीय नौसेना के शीर्ष कमांडरों के सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बदलते समुद्री सुरक्षा माहौल के बीच नौसेना की तैयारियों, निगरानी क्षमता और आधुनिकीकरण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता, पसंदीदा सुरक्षा साझेदार और विश्वास का प्रतीक बनकर खड़ा है।
29 सितंबर 2026 को नौसेना भवन में द्विवार्षिक कमांडर्स सम्मेलन के दूसरे संस्करण को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि समुद्री क्षेत्र में बढ़ते यातायात, छल और संदिग्ध गतिविधियों ने चुनौतियों को पहले से अधिक जटिल बनाया है। ऐसे में निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता को नए स्तर तक ले जाने की जरूरत है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय युद्धपोतों की मौजूदगी दक्षिण चीन सागर, भूमध्य सागर और अटलांटिक महासागर तक देखी जा रही है। उनके मुताबिक, यह भारत की समुद्री सैन्य क्षमता और रणनीतिक पहुंच को दर्शाता है। उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता और रणनीतिक शक्ति प्रदर्शन में नौसेना की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।
रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नौसेना के आधुनिकीकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए भारतीय नौसेना को ‘विकसित भारत 2047’ की रणनीतिक आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि नौसेना केवल समुद्री सीमाओं की सुरक्षा ही नहीं करती, बल्कि आर्थिक सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और देश की रणनीतिक क्षमता को भी मजबूत करती है।
पश्चिम एशिया में संकट के दौरान नौसेना की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने ‘ऊर्जा सुरक्षा अभियान’ के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों, खासकर LPG टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि भारत अपने कच्चे तेल का करीब 85-90 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस का लगभग 50 प्रतिशत समुद्री मार्गों से आयात करता है। ऐसे में समुद्री मार्गों की सुरक्षा सीधे ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था से जुड़ी है।
रक्षा मंत्री ने नौसेना के स्वदेशी जहाज निर्माण प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि हाल में शामिल किए गए युद्धपोतों में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री है। साथ ही उन्होंने भविष्य में घरेलू जरूरतें पूरी करने के साथ मित्र देशों को युद्धपोत निर्यात करने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही।
राजनाथ सिंह ने बताया कि 2026 भारतीय नौसेना के लिए ऐतिहासिक वर्ष है। इस वर्ष 18 युद्धपोतों को शामिल या कमीशन करने की योजना है। उनके अनुसार, यह एक वर्ष में नौसेना के इतिहास में सबसे बड़ी सैन्य वृद्धि होगी और देश के घरेलू नौसैनिक जहाज निर्माण तंत्र की बढ़ती क्षमता को दर्शाएगी।
सम्मेलन में महिला अधिकारियों की अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों और विमानों पर तैनाती, भर्ती और नवाचार से जुड़े प्रयासों का भी उल्लेख हुआ। नौसैनिक अभियानों में महिलाओं की भागीदारी की सराहना की गई।
राजनाथ सिंह ने संयुक्त समुद्री बलों के तहत CTF-154 की कमान संभालने पर नौसेना को बधाई दी। उन्होंने कोच्चि में आयोजित ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस का भी उल्लेख किया, जिसमें 27 देशों के 276 कर्मी, 76 प्रशिक्षक और विषय विशेषज्ञ तथा चार अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल हुए थे।
तीन दिवसीय यह कमांडर्स सम्मेलन 29 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 तक आयोजित हो रहा है। इसमें नौसेना का शीर्ष नेतृत्व परिचालन तैयारियों, समुद्री सुरक्षा और भविष्य की क्षमता विकास से जुड़े मुद्दों की समीक्षा कर रहा है। रक्षा मंत्री ने बदलती चुनौतियों के बीच उच्च स्तर की युद्ध तत्परता बनाए रखने पर जोर दिया और कहा कि सुरक्षित समुद्र भारत की सुरक्षा और विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।