Meta को फ्रांस की अदालत से बड़ा झटका, मीडिया कंटेंट के भुगतान पर बढ़ा दबाव | Meta Faces French Court Pressure

Thu 29-Oct-2026,09:18 PM IST +05:30

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Meta को फ्रांस की अदालत से बड़ा झटका, मीडिया कंटेंट के भुगतान पर बढ़ा दबाव | Meta Faces French Court Pressure Meta Faces French Court Pressure
  • पेरिस कोर्ट ऑफ अपील्स ने फ्रांसीसी नियामक के अंतरिम निर्देशों के खिलाफ कंपनी की अपील खारिज की।

  • समाचार सामग्री के डिजिटल इस्तेमाल के बदले भुगतान और ‘नेबरिंग राइट्स’ का मुद्दा केंद्र में है।

  • कंपनी ने निर्देशों का पालन करने और मीडिया संस्थानों के साथ बातचीत जारी रखने की बात कही।

Paris / :

सोशल मीडिया की दुनिया में बड़ी कंपनियों को अक्सर अपनी शर्तें चलाते देखा जाता है, लेकिन अब फ्रांस में Meta को बड़ा कानूनी झटका लगा है। अदालत के फैसले से मीडिया संस्थानों के भुगतान और डिजिटल अधिकारों की लड़ाई ने नया मोड़ ले लिया है।

फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी Meta को फ्रांस में बड़ा कानूनी झटका लगा है। पेरिस कोर्ट ऑफ अपील्स ने मीडिया संस्थानों के डिजिटल कंटेंट के अधिकारों से जुड़े मामले में फ्रांसीसी नियामक द्वारा लगाए गए अंतरिम निर्देशों के खिलाफ कंपनी की अपील खारिज कर दी है। इस फैसले के बाद Meta पर फ्रांसीसी मीडिया संगठनों के साथ बातचीत करने और उनके कंटेंट के इस्तेमाल से जुड़े नियमों का पालन करने का दबाव बढ़ गया है।

दरअसल, दुनिया भर में टेक कंपनियों और मीडिया संस्थानों के बीच इस बात को लेकर विवाद बढ़ रहा है कि सोशल मीडिया पर प्रकाशित समाचारों और अन्य सामग्री का इस्तेमाल करने के बदले मीडिया कंपनियों को भुगतान मिलना चाहिए या नहीं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को प्रशिक्षित करने में सामग्री के इस्तेमाल को लेकर भी ऐसे विवाद सामने आ रहे हैं।

यूरोपीय संघ के नियमों के तहत प्रिंट मीडिया संस्थान अपने कंटेंट के डिजिटल इस्तेमाल के लिए भुगतान मांग सकते हैं। फ्रांस इन नियमों को सख्ती से लागू करने की कोशिश कर रहा है।

मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो Meta और फ्रांसीसी प्रेस संगठनों के बीच पहले एक समझौता हुआ था, जिसके तहत मीडिया कंटेंट के इस्तेमाल के लिए देय राशि तय की जाती थी। लेकिन यह समझौता साल 2024 में समाप्त हो गया। इसके बाद दोनों पक्ष भुगतान की शर्तों पर सहमति नहीं बना सके। परिणामस्वरूप, फ्रांसीसी मीडिया संस्थानों को वर्ष 2025 से भुगतान नहीं मिला है।

इसके बाद मीडिया संगठनों ने फ्रांस के प्रतिस्पर्धा नियामक से संपर्क किया। जुलाई में नियामक ने Meta के खिलाफ दो अंतरिम निर्देश जारी किए। इनमें कंपनी को मीडिया समूहों के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने, अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से होने वाली आय और संरक्षित मीडिया कंटेंट के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने तथा प्रेस सामग्री को प्रदर्शित करने के तरीके को नुकसान पहुंचाने वाले बदलाव न करने के निर्देश दिए गए।

Meta ने अगस्त में इन निर्देशों को चुनौती दी थी। लेकिन गुरुवार को अदालत ने कंपनी की अपील खारिज कर दी। अदालत के अनुसार, प्रेस प्रकाशकों को मिलने वाली ‘नेबरिंग राइट्स’ यानी संबंधित अधिकारों के भुगतान की राशि तय करने के लिए Meta द्वारा अपनाए गए तरीके उसकी बाजार में प्रभावशाली स्थिति के दुरुपयोग का मामला बन सकते हैं। अदालत ने कहा कि ऐसा आचरण यूरोपीय और फ्रांसीसी प्रतिस्पर्धा कानूनों के तहत प्रतिबंधित हो सकता है।

Meta के प्रवक्ता ने फैसले पर निराशा जताई। हालांकि, कंपनी ने कहा कि वह आगे के विकल्पों का मूल्यांकन कर रही है, लेकिन फिलहाल अंतरिम निर्देशों का पालन जारी रखेगी। कंपनी ने मीडिया प्रकाशकों के साथ सद्भावना से बातचीत करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

वहीं, फ्रांसीसी मीडिया संगठनों के संघ DVP ने फैसले का स्वागत किया है। इस संगठन में Le Monde और Les Echos जैसे समाचार पत्र शामिल हैं। DVP के बोर्ड अध्यक्ष जीन-मैरी कैवाडा ने कहा कि संगठन अपने सदस्यों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिस्पर्धा नियामक के समक्ष और Meta के साथ बातचीत के जरिए प्रयास जारी रखेगा।

यह मामला केवल Meta और फ्रांसीसी मीडिया तक सीमित नहीं है। यह सवाल भी अहम है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर समाचार सामग्री का इस्तेमाल करने वाली बड़ी टेक कंपनियां उसके अधिकारों और भुगतान की जिम्मेदारी कैसे निभाती हैं।