Cyber Security Awareness | साइबर धोखाधड़ी पर DoT का बड़ा कदम, T-CSIRT ने जागरूकता वेबिनार आयोजित किया
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Cyber Security Awareness
DoT की T-CSIRT टीम ने साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल सुरक्षा पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया।
दूरसंचार विभाग, सेवा प्रदाताओं और संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
संदिग्ध लिंक से बचने, सॉफ्टवेयर अपडेट करने और साइबर घटनाओं की रिपोर्ट करने पर जोर दिया गया।
New Delhi / एक क्लिक, एक संदिग्ध लिंक या अनजान अटैचमेंट—और आपकी निजी जानकारी खतरे में पड़ सकती है। साइबर अपराध तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में ऑनलाइन धोखाधड़ी, मैलवेयर और हैकिंग से बचने के लिए कौन-सी सावधानियां जरूरी हैं?
भारत में डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ने के साथ साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव की जरूरत भी लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। इसी दिशा में दूरसंचार विभाग यानी DoT की दूरसंचार साइबर सुरक्षा घटना मोचन टीम, T-CSIRT ने राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह 2026 के तहत एक विशेष जागरूकता वेबिनार आयोजित किया।
इस वेबिनार का मुख्य उद्देश्य लोगों और संस्थानों को साइबर धोखाधड़ी, साइबर हमलों और डिजिटल सुरक्षा से जुड़ी सावधानियों के बारे में जागरूक करना था।
वरिष्ठ अधिकारियों ने किया उद्घाटन
कार्यक्रम का उद्घाटन दूरसंचार महानिदेशक अनिल कुमार गुप्ता और दूरसंचार महानिदेशालय मुख्यालय के अपर महानिदेशक सुरेश पुरी ने किया। इस अवसर पर उप महानिदेशक यानी DDG, T-CSIRT यशवंत कुमार भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में अधिकारियों ने कहा कि साइबर खतरों का स्तर और उनकी जटिलता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में केवल तकनीकी सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति की सतर्कता भी बेहद जरूरी है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि साइबर स्वच्छता को व्यक्तिगत जीवन, संगठनों, समाज और राष्ट्रीय स्तर पर अपनाना चाहिए। डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना साइबर खतरों से बचाव की पहली महत्वपूर्ण कड़ी है।
190 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
इस वेबिनार में दूरसंचार विभाग के मुख्यालय, लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्रों यानी LSA, NCA-T और NCCS के 190 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। दूरसंचार सेवा प्रदाताओं यानी TSP और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं यानी ISP से जुड़े उद्योग प्रतिनिधि भी इसमें शामिल हुए।
वेबिनार के दौरान T-CSIRT के विशेषज्ञों ने साइबर धोखाधड़ी, साइबर स्वच्छता, सोशल इंजीनियरिंग, साइबर किल चेन, मैलवेयर के विभिन्न प्रकार और वेबसाइटों पर होने वाले सामान्य साइबर हमलों की जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने यह भी समझाया कि साइबर हमलावर किस तरह काम करते हैं, उनके हमलों के संकेतों को कैसे पहचाना जा सकता है और ऐसे खतरों से निपटने के लिए कौन-से उपाय अपनाए जा सकते हैं।
ऑनलाइन सुरक्षा के लिए क्या सावधानियां जरूरी हैं?
सत्र में फिशिंग और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के उपायों पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने और अनजान अटैचमेंट खोलने से पहले सावधानी बरतने की आवश्यकता बताई। इसके साथ ही सॉफ्टवेयर को समय पर अपडेट करना और किसी साइबर घटना की जानकारी मिलने पर तुरंत रिपोर्ट करना भी महत्वपूर्ण बताया गया।
ये कदम डिजिटल उपकरणों और ऑनलाइन खातों को सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं।
कुल मिलाकर, इस वेबिनार के माध्यम से दूरसंचार विभाग ने साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और भारत के डिजिटल भविष्य को सुरक्षित बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। संदेश स्पष्ट है—तकनीक के साथ सतर्कता अपनाना भी उतना ही जरूरी है।