School Food Rules | स्कूलों के पास जंक फूड पर रोक? 50 मीटर दायरे में नया नियम!

Thu 24-Sep-2026,01:00 PM IST +05:30

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School Food Rules | स्कूलों के पास जंक फूड पर रोक? 50 मीटर दायरे में नया नियम! Junk Food Ban
  • स्कूलों के 50 मीटर दायरे में जंक फूड बिक्री पर रोक का प्रस्ताव।

  • FSSAI ने HFSS खाद्य पदार्थों के लिए मानक जारी किए।

  • बच्चों के मोटापे और अस्वास्थ्यकर खान-पान को लेकर बढ़ी चिंता।

Maharashtra / :

Mumbai / स्कूल जाते बच्चों के हाथ में चिप्स, कोल्ड ड्रिंक या पिज्जा-बर्गर अब आम दृश्य बन चुका है। लेकिन अगर सरकार की नई योजना लागू हुई तो स्कूलों के आसपास इन चीजों की बिक्री मुश्किल हो सकती है। सवाल है—क्या 50 मीटर की यह सीमा बच्चों की खाने की आदत बदल पाएगी?

स्कूलों के आसपास बदल सकता है खान-पान का माहौल
भारत में मोटापा और अस्वास्थ्यकर खान-पान की बढ़ती चिंता के बीच स्कूलों के आसपास हाई फैट, शुगर और नमक वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री को सीमित करने की तैयारी चल रही है। प्रस्ताव के तहत स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में ऐसे खाद्य पदार्थों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।

यह प्रस्ताव देश के करीब 15 लाख स्कूलों के आसपास मौजूद दुकानों, रेस्तरां और खाने-पीने के छोटे स्टॉल को प्रभावित कर सकता है। इनमें शुगर वाली ड्रिंक्स, चिप्स, समोसे, पिज्जा और बर्गर जैसे लोकप्रिय खाद्य पदार्थ शामिल हो सकते हैं।

FSSAI कर रहा है नियमों पर काम
इस पूरी प्रक्रिया में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) की अहम भूमिका है। FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजित पुनहानी के मुताबिक योजना का उद्देश्य बच्चों को कम उम्र से ही बेहतर खान-पान की आदतों की ओर प्रोत्साहित करना है।

प्रस्तावित व्यवस्था का फोकस केवल दुकानों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि बच्चों की पसंद और खान-पान के व्यवहार में बदलाव लाना भी है। FSSAI का कहना है कि दुकानदार हाई फैट, शुगर और नमक वाले उत्पादों के बजाय ऐसे खाद्य पदार्थ बेच सकते हैं जो तय पोषण मानकों के अनुरूप हों।

2020 से चल रही है प्रक्रिया
स्कूलों के आसपास ऐसे खाद्य पदार्थों की बिक्री पर नियंत्रण का प्रस्ताव पहली बार 2020 में सामने आया था। अभी इसकी कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं है। अगस्त 2026 में FSSAI ने फैट, नमक और चीनी की मात्रा से जुड़े मानक जारी किए थे और प्रस्ताव पर जनता से 6 अक्टूबर तक सुझाव मांगे गए हैं।

यानी फिलहाल यह व्यवस्था अंतिम कानून नहीं बनी है। आगे मिलने वाली प्रतिक्रियाओं और नियामकीय प्रक्रिया के बाद नियमों का अंतिम स्वरूप तय किया जाएगा।

महाराष्ट्र में पहले से सख्त कदम
महाराष्ट्र ने इस मामले में अलग और ज्यादा सख्त रुख अपनाया है। राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंडे के अनुसार, स्कूलों से 50 मीटर के दायरे में दुकानों को ऐसे उत्पाद रखने से रोकने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है।

राज्य के आंकड़ों के मुताबिक निरीक्षकों ने अब तक स्कूलों के 50 मीटर के भीतर 133 दुकानों में नियमों का उल्लंघन पाया है। इनमें से 51 दुकानों को अपना कारोबार बंद करने का निर्देश दिया गया है।

दुकानदारों को कारोबार घटने की चिंता
प्रस्तावित नियमों से स्कूलों के आसपास कारोबार करने वाले छोटे दुकानदारों में चिंता भी बढ़ी है। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में कुछ दुकानदारों ने बिक्री में बड़ी गिरावट की आशंका जताई है।

खाद्य व्यापार से जुड़े संगठनों का कहना है कि कई स्कूल घनी आबादी वाले बाजारों के बीच स्थित हैं, जहां दुकानें सिर्फ बच्चों को नहीं बल्कि आम लोगों को भी सामान बेचती हैं। ऐसे में नियमों को लागू करना छोटे कारोबारियों के लिए चुनौती बन सकता है।

बड़ी कंपनियों पर भी असर की संभावना
नए नियमों का असर केवल स्थानीय दुकानदारों तक सीमित नहीं रह सकता। पेप्सिको, नेस्ले, कोका-कोला और मॉन्डेलेज जैसी बड़ी कंपनियों के कई लोकप्रिय उत्पाद भी इस बहस के दायरे में हैं।

भारत पहले ही पैकेज्ड फूड पर हाई फैट, नमक और चीनी वाले उत्पादों के लिए सामने चेतावनी लेबल को लेकर नियमों को सख्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में स्कूलों के आसपास बिक्री पर संभावित रोक खाद्य कंपनियों के लिए एक और नियामकीय चुनौती बन सकती है।

बढ़ते मोटापे ने बढ़ाई चिंता
बच्चों में बढ़ते मोटापे के आंकड़े इस बहस की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण हैं। विश्व मोटापा महासंघ के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 5 से 19 वर्ष की उम्र के अधिक वजन या मोटापे से प्रभावित बच्चों की संख्या 2015 के करीब 2.8 करोड़ से बढ़कर 2025 में लगभग 4.1 करोड़ हो गई।

प्रस्ताव के समर्थकों का तर्क है कि बच्चों को कम उम्र में ही अस्वास्थ्यकर भोजन से दूर रखने के प्रयास लंबे समय में बेहतर खान-पान की आदतें विकसित करने में मदद कर सकते हैं। वहीं कारोबार से जुड़े लोग नियमों के व्यावहारिक असर और छोटे दुकानदारों की आजीविका को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

अब निगाह इस बात पर है कि जनता और उद्योग से मिले सुझावों के बाद FSSAI स्कूलों के आसपास जंक फूड की बिक्री को लेकर नियमों का अंतिम रूप किस तरह तय करता है।