जम्मू-कश्मीर में कनेक्टिविटी की नई क्रांति: चिनाब पुल, रेल और सुरंगों से बदलेगी घाटी की तस्वीर
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Jammu-Kashmir Connectivity Revolution
रेल कनेक्टिविटी: यूएसबीआरएल परियोजना के जरिए कश्मीर घाटी राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जुड़ी है।
सड़क और सुरंगें: सोनमर्ग और ज़ोजिला सुरंगों से हर मौसम में आवागमन बेहतर बनाने का लक्ष्य है।
व्यापार और पर्यटन: बेहतर परिवहन से किसानों, व्यापारियों और पर्यटन क्षेत्र को नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
Jammu / जिस कश्मीर को कभी दुर्गम पहाड़ों, बर्फबारी और मुश्किल रास्तों के कारण देश के बाकी हिस्सों से जोड़ना बड़ी चुनौती माना जाता था, वहां अब कनेक्टिविटी की नई तस्वीर उभर रही है। दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च पुल और आधुनिक सुरंगें इस बदलाव की कहानी बयां कर रही हैं।
जम्मू-कश्मीर में रेल, सड़क और हवाई संपर्क को मजबूत बनाने के लिए कई बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर काम किया गया है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य सिर्फ यात्रा को आसान बनाना नहीं, बल्कि स्थानीय व्यापार, पर्यटन, रोजगार और किसानों को राष्ट्रीय बाजारों से जोड़ना भी है। उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक से लेकर चिनाब पुल और ज़ोजिला सुरंग तक, ये परियोजनाएं क्षेत्र की कनेक्टिविटी को नया स्वरूप दे रही हैं।
सबसे पहले बात उस रेलवे परियोजना की, जिसने कश्मीर घाटी को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ा है।
उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक, यानी यूएसबीआरएल परियोजना, जून 2025 में शुरू की गई। लगभग 43,780 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना 272 किलोमीटर लंबे दुर्गम हिमालयी क्षेत्र से गुजरती है। इसमें 36 सुरंगें और 943 पुल शामिल हैं। परियोजना ने रेल संपर्क के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए आवागमन और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर भी खोले हैं।
इस परियोजना का सबसे बड़ा आकर्षण चिनाब रेलवे पुल है। जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में चिनाब नदी पर बना यह पुल दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च पुल है। इसकी कुल लंबाई 1,315 मीटर और आर्च की लंबाई 467 मीटर है। यह नदी तल से लगभग 359 मीटर ऊंचा है। इसे तेज हवाओं और भूकंपीय गतिविधियों जैसी कठिन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
इसी परियोजना में अंजी खड्ड पुल भी महत्वपूर्ण है। यह भारत का पहला केबल-आधारित रेलवे पुल है। इसका 193 मीटर ऊंचा मुख्य टावर उल्टे अंग्रेजी अक्षर ‘Y’ के आकार का है।
इसके अलावा, 12.77 किलोमीटर लंबी टी-50 रेल सुरंग खड़ी और सुंबर को जोड़ती है। इसका निर्माण कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों के बीच किया गया, जिसमें जल रिसाव, भूस्खलन और चट्टानों में दरारों जैसी चुनौतियां सामने आईं।
अब बात करते हैं सड़क संपर्क और आधुनिक सुरंगों की।
सोनमर्ग की ज़ेड-मोड़ सुरंग का उद्घाटन जनवरी 2025 में किया गया था। लगभग 6.4 किलोमीटर लंबी यह सुरंग कठिन मौसम के दौरान सड़क संपर्क को बेहतर बनाने में मदद करती है। इससे सोनमर्ग तक पहुंच आसान हुई है और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
वहीं, ज़ोजिला सुरंग जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बीच सालभर सड़क संपर्क उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना है। लगभग 13.153 किलोमीटर लंबी इस सुरंग का निर्माण कठिन ऊंचाई वाले क्षेत्र में किया जा रहा है। जून 2026 में मुख्य सुरंग की खुदाई दोनों ओर से आगे बढ़ते हुए जुड़ने के चरण तक पहुंच गई थी। परियोजना पूरी होने पर सोनमर्ग से मीनामर्ग की यात्रा में लगने वाला समय लगभग दो घंटे से घटकर करीब 30 मिनट होने की उम्मीद है।
इसके साथ ही दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे, शोपियां बाईपास और सीमावर्ती इलाकों में सड़क सुधार परियोजनाएं भी संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा हैं।
हवाई संपर्क के क्षेत्र में भी विस्तार की योजना है।
श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सिविल एन्क्लेव के विस्तार के लिए फरवरी 2026 में 1,677 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई। प्रस्तावित नए टर्मिनल में व्यस्ततम समय के दौरान 2,900 यात्रियों को संभालने और सालाना एक करोड़ यात्रियों की क्षमता विकसित करने की योजना है।
इसके अलावा, उड़ान योजना के तहत उधमपुर और किश्तवाड़ में क्षेत्रीय हवाई संपर्क के विकास की योजना बनाई गई है। इससे दूरदराज के इलाकों तक पहुंच आसान होने और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
कनेक्टिविटी का फायदा किसानों और व्यापारियों को कैसे मिलेगा?
बेहतर रेल और सड़क संपर्क से सेब, केसर, सूखे मेवे, पश्मीना और कश्मीरी हस्तशिल्प जैसे उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। जम्मू-कश्मीर के सांबा में गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल भी चालू है। कठुआ, अनंतनाग और जम्मू में ऐसे अन्य टर्मिनल विकसित करने के प्रस्ताव हैं।
इन सुविधाओं से माल ढुलाई, भंडारण और लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है। साथ ही, निर्माण और परिवहन से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, जम्मू-कश्मीर में रेल, सड़क, सुरंगों और हवाई संपर्क का विकास क्षेत्र को देश के आर्थिक नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, इन परियोजनाओं का वास्तविक लाभ उनके समय पर पूरा होने, नियमित संचालन और स्थानीय लोगों तक सुविधाओं की पहुंच पर भी निर्भर करेगा।
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