भारत की स्वदेशी ताकत को नई उड़ान? FSS-1 का जलावतरण, FSS-5 की कील रखेंगे राजनाथ सिंह
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Fleet Support Ship
FSS-1 का विशाखापत्तनम में जलावतरण होगा।
FSS-5 की कील रखी जाएगी और नई सुविधाओं का उद्घाटन होगा।
शिपयार्ड 45,000 DWT तक के पोत बनाने में सक्षम होगा।
New Delhi / भारत की स्वदेशी पोत निर्माण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में 6 अक्टूबर 2026 का दिन महत्वपूर्ण रहने वाला है। रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन और शुभारंभ करेंगे। इस दौरान वे भारतीय नौसेना के लिए तैयार किए जा रहे बेड़ा सहायता पोत-1 (FSS-1) का जलावतरण करेंगे, जबकि FSS-5 की कील रखेंगे। इसके साथ ही उन्नत स्लिपवे-4 और 300 टन क्षमता वाली गोलियाथ क्रेन का भी उद्घाटन किया जाएगा।
इन परियोजनाओं का महत्व केवल एक शिपयार्ड तक सीमित नहीं है। यह भारत की बढ़ती स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता और बड़े रक्षा प्लेटफॉर्म तैयार करने की क्षमता को दर्शाता है। विस्तारित लंबाई और बढ़ी हुई भार वहन क्षमता से लैस उन्नत स्लिपवे-4 को 300 टन क्षमता वाली गोलियाथ क्रेन का सहयोग मिलेगा। इसके बाद हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड 45,000 डेडवेट टन (DWT) तक के पोतों का निर्माण और जलावतरण करने में सक्षम होगा।
इससे शिपयार्ड के लिए बड़े और अधिक जटिल प्लेटफॉर्म के निर्माण का दायरा बढ़ेगा। यानी आने वाले समय में बड़े आकार के पोतों को तैयार करने और उन्हें समुद्र में उतारने की क्षमता में उल्लेखनीय विस्तार देखने को मिलेगा। वहीं, भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे पांच बेड़ा सहायता पोतों की श्रृंखला में FSS-1 एक अहम कड़ी है। स्टील कटिंग के महज 18 महीने बाद इसे बंगाल की खाड़ी के जल में उतारा जाएगा। करीब 43,500 टन भार वाले ये पोत समुद्र में तैनात युद्धपोतों को आवश्यक पुन: आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए बनाए जा रहे हैं।
समुद्र में लंबे समय तक युद्धपोतों की तैनाती के दौरान ईंधन, सामग्री और अन्य जरूरी संसाधनों की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में बेड़ा सहायता पोत नौसेना की समुद्र में निरंतर मौजूदगी और परिचालन पहुंच को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे। खास तौर पर हिंद महासागर क्षेत्र में लंबे समय तक नौसैनिक तैनाती की क्षमता बढ़ाने के लिहाज से यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण है।
इसी क्रम में FSS-5 की कील रखे जाने से इस परियोजना में श्रृंखलाबद्ध उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत मिलेगा। इसका मतलब है कि पोत निर्माण कार्यक्रम को एक व्यवस्थित और निरंतर प्रक्रिया के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।
इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहेंगे।
कुल मिलाकर, FSS-1 का जलावतरण, FSS-5 की कील रखना और नई शिपयार्ड सुविधाओं का उद्घाटन भारत की स्वदेशी पोत निर्माण क्षमता, नौसैनिक लॉजिस्टिक समर्थन और बड़े रक्षा प्लेटफॉर्म के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा सकता है।