बच्चों में बोन कैंसर के इलाज में ‘ग्रोइंग इम्प्लांट’ तकनीक नई उम्मीद बनकर उभरी

Sun 15-Mar-2026,08:46 PM IST +05:30

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बच्चों में बोन कैंसर के इलाज में ‘ग्रोइंग इम्प्लांट’ तकनीक नई उम्मीद बनकर उभरी Bone Cancer Treatment Children
  • बच्चों के बोन कैंसर इलाज में ‘ग्रोइंग इम्प्लांट’ नई तकनीक.

  • बढ़ते शरीर के अनुसार इम्प्लांट की लंबाई समायोजित की जा सकती है.

  • बच्चों को सामान्य जीवन जीने में मिल सकती है बेहतर मदद.

Rajasthan / Jaipur :

Jaipur / बच्चों में होने वाले बोन कैंसर के इलाज के क्षेत्र में एक नई तकनीक ‘ग्रोइंग इम्प्लांट’ तेजी से उम्मीद की किरण बनकर सामने आ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तकनीक की मदद से न केवल कैंसरग्रस्त हड्डी का उपचार संभव हो रहा है, बल्कि बच्चे के बढ़ते शरीर के साथ प्रभावित अंग की लंबाई को भी समायोजित किया जा सकता है। इससे बच्चों को भविष्य में चलने-फिरने और सामान्य जीवन जीने में काफी मदद मिलती है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में हड्डियों का विकास कई वर्षों तक जारी रहता है, इसलिए पारंपरिक इम्प्लांट कई बार लंबे समय के लिए उपयुक्त साबित नहीं होते। ऐसे मामलों में ‘ग्रोइंग इम्प्लांट’ एक बेहतर विकल्प के रूप में उभर रहा है। जयपुर स्थित भगवान महावीर कैंसर अस्पताल के ऑर्थोपेडिक ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. प्रवीण गुप्ता ने बताया कि बच्चों में जब बोन कैंसर के कारण हड्डी का कोई हिस्सा निकालना पड़ता है, तो पारंपरिक तरीके से लगाए गए इम्प्लांट समय के साथ छोटे पड़ सकते हैं। इससे बच्चे के हाथ या पैर की लंबाई में असमानता आ सकती है और उन्हें चलने-फिरने में कठिनाई हो सकती है। ‘ग्रोइंग इम्प्लांट’ तकनीक इस समस्या को काफी हद तक हल कर देती है, क्योंकि इसमें लगाए गए विशेष प्रकार के इम्प्लांट को बच्चे की बढ़ती उम्र और हड्डियों के विकास के अनुसार समय-समय पर बढ़ाया या समायोजित किया जा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक खासतौर पर उन बच्चों के लिए उपयोगी साबित हो रही है जिनकी हड्डी का बड़ा हिस्सा कैंसर के कारण हटाना पड़ता है। पारंपरिक सर्जरी में ऐसे मामलों में या तो कृत्रिम जोड़ लगाए जाते थे या फिर कई बार प्रभावित अंग को काटने तक की नौबत आ जाती थी। लेकिन ‘ग्रोइंग इम्प्लांट’ तकनीक ने इस चुनौती को काफी हद तक कम कर दिया है। इस तकनीक के जरिए डॉक्टर कैंसरग्रस्त हिस्से को हटाकर उसकी जगह विशेष प्रकार का इम्प्लांट लगाते हैं, जिसे भविष्य में जरूरत के अनुसार बढ़ाया जा सकता है। इससे बच्चे की हड्डी की लंबाई लगभग सामान्य रूप से बढ़ती रहती है और अंग के विकास में ज्यादा अंतर नहीं आता। डॉक्टरों का कहना है कि आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के कारण अब कैंसर के इलाज में न केवल जीवन बचाने पर ध्यान दिया जा रहा है, बल्कि मरीज की जीवन गुणवत्ता को भी बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है। ‘ग्रोइंग इम्प्लांट’ इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि यह तकनीक हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं होती। इसके लिए रोग की स्थिति, कैंसर का प्रकार, हड्डी की क्षति और बच्चे की उम्र जैसे कई पहलुओं का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन किया जाता है। फिर विशेषज्ञों की टीम तय करती है कि इस तकनीक का उपयोग किया जा सकता है या नहीं। इसके बावजूद चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञ मानते हैं कि यह तकनीक भविष्य में बच्चों के बोन कैंसर के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे न केवल उपचार की सफलता दर बढ़ने की उम्मीद है, बल्कि बच्चों को सामान्य जीवन जीने का बेहतर अवसर भी मिल सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि जागरूकता और समय पर उपचार से बोन कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से भी प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सकता है।