जनऔषधि दवाओं की गुणवत्ता मजबूत, IPC-PMBI-NIPER के अहम समझौते
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IPC-PMBI-Niper-Drug-Quality-India-MOU
भारतीय फार्माकोपिया आयोग ने पीएमबीआई और एनआईपीईआर के साथ समझौता कर जनऔषधि दवाओं की गुणवत्ता परीक्षण और निगरानी प्रणाली को मजबूत बनाने की पहल की।
फार्माकोविजिलेंस, एडीआर रिपोर्टिंग और फार्मासिस्ट प्रशिक्षण के माध्यम से दवाओं के सुरक्षित और तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।
संयुक्त अनुसंधान के तहत अशुद्धियों की पहचान, बायोलॉजिक्स और नई थेरेपी उत्पादों के लिए गुणवत्ता मानक विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा।
Delhi/ प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत सरकार स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और दवा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) ने Pharmaceuticals and Medical Devices Bureau of India और National Institute of Pharmaceutical Education and Research Hajipur के साथ दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों का उद्देश्य दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और अनुसंधान को नई मजबूती देना है।
पहला समझौता भारतीय फार्माकोपिया आयोग और पीएमबीआई के बीच हुआ है, जिसका उद्देश्य प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। इस सहयोग के तहत पीएमबीआई समय-समय पर जनऔषधि दवाओं के बैच आईपीसी को गुणवत्ता परीक्षण के लिए उपलब्ध कराएगा।
इस पहल से न केवल दवाओं की गुणवत्ता में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि मरीजों को सुरक्षित और प्रभावी दवाएं भी सुनिश्चित होंगी। इसके साथ ही जनऔषधि केंद्रों में राष्ट्रीय फार्मुलरी (NFI) के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे दवाओं का तर्कसंगत उपयोग सुनिश्चित हो सके।
समझौते के तहत फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया (PvPI) को भी मजबूत किया जाएगा। जनऔषधि केंद्रों पर क्यूआर कोड और टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर के माध्यम से प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं (ADR) की रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे रोगी सुरक्षा में सुधार होगा।
इसके अलावा आईपीसी और पीएमबीआई मिलकर फार्मासिस्टों और अन्य हितधारकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं और जागरूकता अभियान भी आयोजित करेंगे। इन कार्यक्रमों में दवाओं के सुरक्षित उपयोग, फार्माकोविजिलेंस और सार्वजनिक स्वास्थ्य में फार्मासिस्टों की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
दूसरा समझौता आईपीसी और एनआईपीईआर हाजीपुर के बीच हुआ है, जो फार्मास्युटिकल अनुसंधान और अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देगा। इस सहयोग के तहत दवाओं में मौजूद अशुद्धियों, विशेष रूप से नाइट्रोसेमाइन जैसी जीनविषाक्त अशुद्धियों पर संयुक्त शोध किया जाएगा।
यह अनुसंधान दवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और सुरक्षित मानकों को स्थापित करने में मदद करेगा। साथ ही बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर्स और नई जीन थेरेपी उत्पादों के लिए गुणवत्ता नियंत्रण और विश्लेषणात्मक विधियों के विकास पर भी काम किया जाएगा।
दोनों संस्थान मिलकर प्रशिक्षण, सेमिनार, कार्यशालाएं और वैज्ञानिक कार्यक्रम आयोजित करेंगे। साथ ही छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए इंटर्नशिप और फेलोशिप के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे फार्मास्युटिकल क्षेत्र में कौशल और ज्ञान का विस्तार होगा।
यह पहल भारत के स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इन समझौतों के जरिए दवा गुणवत्ता, रोगी सुरक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा, जिससे भारत की वैश्विक फार्मास्युटिकल क्षेत्र में स्थिति और मजबूत होगी।