ग्वालियर में US ट्रेड डील के विरोध में कांग्रेस का आंदोलन उग्र
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ग्वालियर में US ट्रेड डील के खिलाफ युवा कांग्रेस का आंदोलन तेज, किसानों और छोटे व्यापारियों के हितों पर खतरे का आरोप लगाकर विरोध प्रदर्शन जारी।
सातवें दिन आंदोलन में राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के नेताओं की भागीदारी, केंद्र सरकार से डील रद्द करने की मांग और आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी।
भितरवार मंडी विवाद को लेकर भी सियासत गरमाई, कांग्रेस ने प्रशासन पर किसानों की आवाज दबाने और अन्यायपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाया।
Gwalior/ केंद्र सरकार की प्रस्तावित US ट्रेड डील के विरोध में Gwalior में युवा कांग्रेस का आंदोलन अब तेज होता जा रहा है। कृषि उपज मंडी के मुख्य द्वार पर जारी धरना सातवें दिन और उग्र हो गया, जहां बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और नेताओं ने भाग लेकर इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की चेतावनी दी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह डील भारतीय किसानों और छोटे व्यापारियों के हितों के खिलाफ है और इससे स्थानीय बाजार पर गंभीर असर पड़ सकता है।
धरने के सातवें दिन आंदोलन को मजबूत समर्थन मिला, जब कई राष्ट्रीय और प्रदेश स्तरीय नेता इसमें शामिल हुए। यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव हेबरन सिंह कंसाना, महिला कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष मनीषा रावत और जिला ग्रामीण अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह सहित कई पदाधिकारियों ने मंच साझा किया। नेताओं ने इस डील को किसान विरोधी बताते हुए इसे तुरंत रद्द करने की मांग उठाई।
महिला कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष मनीषा रावत ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह व्यापारिक समझौता किसानों की आय पर सीधा असर डालेगा। उनके अनुसार, इससे छोटे व्यापारी भी प्रभावित होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था कमजोर हो सकती है। उन्होंने साफ कहा कि जब तक सरकार इस डील को वापस नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
धरने के दौरान भितरवार मंडी में किसान और प्रशासन के बीच हाल ही में हुई झड़प का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया। यूथ कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन किसानों की आवाज दबाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि किसान पर झूठा मामला दर्ज कर उसे हिरासत में लेना अन्यायपूर्ण है और कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर संघर्ष जारी रखेगी।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार ने इस ट्रेड डील पर पुनर्विचार नहीं किया, तो यह आंदोलन डबरा से आगे बढ़कर पूरे जिले और संभाग में फैल सकता है। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी से यह स्पष्ट है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक रूप से और अधिक गर्मा सकता है।