कानपुर में नकली सीमेंट फैक्ट्री का खुलासा! एयरपोर्ट और CM ग्रिड की सड़कों तक सप्लाई

Fri 16-Oct-2026,12:41 PM IST +05:30

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कानपुर में नकली सीमेंट फैक्ट्री का खुलासा! एयरपोर्ट और CM ग्रिड की सड़कों तक सप्लाई Kanpur Fake Cement
  • कानपुर की फैक्ट्री में एक्सपायर्ड सीमेंट से नकली सीमेंट बनाने का आरोप।

  • पुलिस ने एक हजार से अधिक भरी और तीन हजार से ज्यादा खाली बोरियां बरामद कीं।

  • एयरपोर्ट और सीएम ग्रिड की सड़कों के निर्माण में सप्लाई के आरोपों की जांच जारी है।

Uttar Pradesh / Kanpur :

Kanpur / जिस सीमेंट से मजबूत इमारतें और सड़कें बनने की उम्मीद होती है, अगर वही सीमेंट नकली निकले तो कितना बड़ा खतरा पैदा हो सकता है? उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक कथित फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जिसमें नामी कंपनियों के ब्रांड की आड़ में नकली सीमेंट बेचने के आरोप लगे हैं।

उत्तर प्रदेश के कानपुर में नकली सीमेंट के कारोबार को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, एक फैक्ट्री में एक्सपायर्ड सीमेंट को दोबारा पीसकर नामी कंपनियों की छपी हुई बोरियों में भरने और बाजार में बेचने का कथित खेल चल रहा था। इस मामले में लखनऊ एयरपोर्ट, सीएम ग्रिड की सड़कों और मकानों के निर्माण कार्यों में नकली सीमेंट की सप्लाई किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं।

पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के अनुसार, फैक्ट्री संचालकों ने अदाणी समूह की एसीसी और अंबुजा सीमेंट कंपनियों की डीलरशिप ली थी। आरोप है कि इसी डीलरशिप की आड़ में पनकी के इस्पात नगर स्थित फैक्ट्री में नकली सीमेंट तैयार कर बाजार में बेचा जा रहा था।

मामला तब सामने आया, जब लखनऊ एयरपोर्ट पर नकली सीमेंट मिलने की जानकारी के बाद जांच शुरू की गई। इसके बाद पुलिस ने फैक्ट्री में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान वहां से सीमेंट से भरी एक हजार से अधिक बोरियां और तीन हजार से ज्यादा खाली बोरियां बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है।

जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, कानपुर के नीरज गुप्ता और उनके भाई धीरज गुप्ता इस कारोबार में शामिल थे। उनके साथ मेरठ के सुनील मित्तल और निशांत मित्तल के भी जुड़े होने की बात कही गई है। पुलिस ने फैक्ट्री के मुंशी राहुल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि फैक्ट्री संचालक दोनों भाइयों समेत चार साझेदारों की तलाश की जा रही है।

अब समझिए इस कथित कारोबार का तरीका। पुलिस के मुताबिक, आरोपी झांसी, ललितपुर और बुंदेलखंड के आसपास के इलाकों में सीमेंट गोदामों से एक्सपायर्ड सीमेंट नीलामी में खरीदते थे। यह सीमेंट कथित तौर पर 10 से 20 रुपये प्रति बोरी की दर से खरीदा जाता था। इसके बाद मिक्सर मशीनों में उसे पीसकर दोबारा बोरियों में भरा जाता था।

आरोप है कि एसीसी और अंबुजा जैसे ब्रांड के नाम वाली बोरियों की छपाई एक प्रिंटिंग प्रेस से कराई जाती थी। एक सादी बोरी और उसकी प्रिंटिंग पर करीब छह रुपये खर्च होने की बात कही गई है। इसके बाद तैयार बोरी को 250 से 280 रुपये तक में बेचा जाता था।

पुलिस के अनुसार, इस गिरोह की सप्लाई क्षमता प्रति माह 30 हजार से अधिक बोरियों की बताई गई है। कथित तौर पर आठ से दस जिलों में सीमेंट पहुंचाया जाता था। सीएम ग्रिड की सड़कों, एयरपोर्ट और बड़े निर्माण ठेकेदारों तक सप्लाई के संपर्क होने की बात भी जांच में सामने आई है।

इस मामले में सबसे गंभीर सवाल निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और लोगों की सुरक्षा को लेकर उठता है। यदि निर्माण में इस्तेमाल हुई सामग्री मानकों पर खरी नहीं उतरती, तो इमारतों और सड़कों की मजबूती प्रभावित हो सकती है। हालांकि, संबंधित निर्माण स्थलों पर इस्तेमाल हुए सीमेंट की गुणवत्ता और वास्तविक नुकसान का पता जांच और तकनीकी परीक्षण के बाद ही चलेगा।

फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है और मामले की जांच जारी है। अब देखना होगा कि जांच में इस कथित नेटवर्क से जुड़े और कौन-से तथ्य सामने आते हैं तथा निर्माण कार्यों में सप्लाई किए गए सीमेंट की गुणवत्ता को लेकर क्या निष्कर्ष निकलता है।