बांग्लादेश में वेतन की मांग पर मजदूरों का प्रदर्शन, 30 फैक्ट्रियां बंद, क्या बढ़ेगी सैलरी? | Bangladesh Garment Workers Protest
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Bangladesh Garment Workers Protest
बांग्लादेश के कपड़ा मजदूरों ने न्यूनतम वेतन 30 हजार टका करने की मांग की।
सरकार ने वेतन की समीक्षा के लिए छह सदस्यीय बोर्ड का गठन किया।
प्रदर्शन के कारण 25 से 30 फैक्ट्रियां बंद हुईं और यातायात प्रभावित हुआ।
बांग्लादेश की कपड़ा फैक्ट्रियों में मजदूरों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है। सरकार ने वेतन बढ़ाने के लिए नया बोर्ड तो बना दिया, लेकिन प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे। आखिर मजदूरों की मांग क्या है और इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर कितना पड़ेगा?
बांग्लादेश में गारमेंट इंडस्ट्री के हजारों मजदूर वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। रविवार को सरकार ने मजदूरों के वेतन की समीक्षा के लिए छह सदस्यीय वेज बोर्ड यानी वेतन निर्धारण बोर्ड का गठन किया। इसके साथ ही श्रम मंत्री अरिफुल हक चौधरी ने कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की। हालांकि, सरकार की इस घोषणा के बावजूद कई औद्योगिक क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन जारी रहे।
दरअसल, बांग्लादेश के कपड़ा मजदूरों की मांग है कि उनका न्यूनतम मासिक वेतन बढ़ाकर 30 हजार टका किया जाए। यह रकम मौजूदा 12 हजार 500 टका से दोगुने से भी अधिक है। भारतीय मुद्रा में यह करीब 245 अमेरिकी डॉलर के बराबर बताई गई है।
मजदूरों का कहना है कि खाने-पीने की चीजों, मकान के किराये, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं की लागत लगातार बढ़ रही है। इससे उनकी खरीदने की क्षमता काफी घट गई है और मौजूदा वेतन में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।
श्रम एवं रोजगार मंत्री अरिफुल हक चौधरी के मुताबिक, मजदूर प्रतिनिधियों और उद्योग जगत के नेताओं के साथ चर्चा के बाद छह सदस्यीय वेतन बोर्ड बनाया गया है। उन्होंने कर्मचारियों से फैक्ट्रियों में वापस लौटने और कामकाज शुरू करने की अपील की। लेकिन इस घोषणा के बाद भी रविवार को हजारों मजदूर सड़कों पर उतर आए।
राजधानी ढाका में प्रदर्शनकारियों ने एक व्यस्त चौराहे को जाम कर दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। पुलिस के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों पर ईंटें भी फेंकीं। वहीं, राजधानी के बाहरी इलाके गाजीपुर में सैकड़ों मजदूरों ने एक प्रमुख राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ।
गाजीपुर इंडस्ट्रियल पुलिस के सुपरिटेंडेंट मोहम्मद अमजद हुसैन के मुताबिक, प्रदर्शन के कारण फैक्ट्री मालिकों को 25 से 30 कारखाने बंद करने पड़े। हालात को नियंत्रित रखने के लिए बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के जवानों को भी तैनात किया गया है।
इससे पहले शनिवार को ढाका के बाहरी इलाके अशुलिया में भी मजदूरों ने वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। यह इलाका बांग्लादेश के प्रमुख गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में शामिल है। वहां भी दर्जनों फैक्ट्रियों में कामकाज रोकना पड़ा था।
इस आंदोलन का असर केवल फैक्ट्री संचालन तक सीमित नहीं है। बांग्लादेश की रेडीमेड गारमेंट इंडस्ट्री चीन के बाद दुनिया की सबसे बड़ी कपड़ा निर्यातक इंडस्ट्री मानी जाती है। इस क्षेत्र में करीब 40 लाख लोग काम करते हैं और देश की कुल निर्यात आय में इसका योगदान 80 प्रतिशत से अधिक है। देश की जीडीपी में भी इस उद्योग की हिस्सेदारी लगभग 10 प्रतिशत बताई जाती है।
श्रम मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि फैक्ट्रियों में लंबे समय तक कामकाज बाधित रहा, तो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को होने वाली निर्यात आपूर्ति और भुगतान में देरी हो सकती है। इससे कंपनियों के साथ-साथ मजदूरों की आर्थिक स्थिति पर भी दबाव बढ़ सकता है।
उधर, कपड़ा निर्माता पहले से ही बढ़ती उत्पादन लागत, गैस और बिजली की अनियमित उपलब्धता तथा मध्य-पूर्व के तनाव से प्रभावित ऊर्जा बाजार की अनिश्चितता जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नया वेतन बोर्ड मजदूरों की मांगों का समाधान निकाल पाएगा, या बांग्लादेश की कपड़ा इंडस्ट्री में जारी यह आंदोलन आने वाले दिनों में और गंभीर रूप ले सकता है?