भारत-नेपाल सीमा पर जांच के नाम पर दुर्व्यवहार, लोगों में बढ़ा आक्रोश

Tue 21-Apr-2026,12:52 PM IST +05:30

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भारत-नेपाल सीमा पर जांच के नाम पर दुर्व्यवहार, लोगों में बढ़ा आक्रोश India-Nepal-Border-Issue-Security-Misconduct-Custom-Duty
  • भारत-नेपाल सीमा पर स्थानीय लोगों ने नेपाली सुरक्षा बलों पर जांच के दौरान दुर्व्यवहार, महिलाओं के साथ अभद्रता और सामान जब्त करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

  • नई सरकार के बाद सीमा पर सख्ती बढ़ने से छोटे व्यापारी, मजदूर और आम नागरिकों के दैनिक जीवन और सीमावर्ती व्यापार पर व्यापक असर पड़ा है।

  • 100 रुपये से अधिक के सामान पर कस्टम ड्यूटी लागू होने से लोगों की लागत बढ़ी और नाराजगी तेज हुई, सरकार से हस्तक्षेप की मांग उठी है।

Central Region / Kathmandu :

Nepal/ भारत-नेपाल सीमा पर हाल के दिनों में स्थानीय लोगों के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिकों ने आरोप लगाया है कि नेपाली सुरक्षा बल जांच के नाम पर आम लोगों के साथ अमानवीय व्यवहार कर रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और उन्होंने नेपाल सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

स्थानीय निवासियों के अनुसार, नेपाल में नई सरकार बनने के बाद सीमा पर तैनात सुरक्षा कर्मियों के व्यवहार में बदलाव देखा गया है। लोगों का कहना है कि जांच के दौरान महिलाओं के साथ अभद्रता की घटनाएं सामने आई हैं। साथ ही खाने-पीने की वस्तुएं और दैनिक उपयोग के सामान भी जब्त किए जाने के आरोप लगाए गए हैं, जिससे आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोगों का कहना है कि वे रोजमर्रा की जरूरतों के लिए सीमा पार आते-जाते हैं, लेकिन अब सख्ती बढ़ने से उनका जीवन प्रभावित हो रहा है। विशेष रूप से छोटे व्यापारी और मजदूर वर्ग इस स्थिति से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

इसके अलावा, नेपाल सरकार के हालिया फैसले भी विवाद का कारण बने हुए हैं। 100 रुपये से अधिक के सामान पर कस्टम ड्यूटी लागू किए जाने से स्थानीय व्यापार और आम जनजीवन पर असर पड़ा है। लोगों का कहना है कि इस नियम से उनकी दैनिक जरूरतों की लागत बढ़ गई है और सीमावर्ती व्यापार लगभग ठप होने की कगार पर पहुंच गया है।

स्थिति को लेकर स्थानीय संगठनों ने भी चिंता जताई है और सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मुद्दे का समाधान समय रहते नहीं किया गया, तो यह सीमा पर दोनों देशों के बीच तनाव का कारण बन सकता है।

फिलहाल, दोनों देशों के प्रशासनिक स्तर पर इस मुद्दे पर किसी ठोस प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों की नजर अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।