चेन्नई में फर्जी दस्तावेजों का बड़ा रैकेट बेनकाब! PMO की मुहरें और अमेरिकी वीजा के कागजात बरामद?

Tue 13-Oct-2026,03:40 PM IST +05:30

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चेन्नई में फर्जी दस्तावेजों का बड़ा रैकेट बेनकाब! PMO की मुहरें और अमेरिकी वीजा के कागजात बरामद? Chennai Fake Certificates Racket
  • चेन्नई में कथित फर्जी दस्तावेज रैकेट के मामले में छह आरोपी गिरफ्तार।

  • पुलिस ने 300 से अधिक संदिग्ध नकली मुहरें और प्रिंटिंग उपकरण जब्त किए।

  • पांच लाख से अधिक लोगों तक फर्जी प्रमाणपत्र पहुंचने का दावा जांच के दायरे में है।

Tamil Nadu / Chennai :

Chennai / क्या दस साल से चल रहा था फर्जी सरकारी दस्तावेज बनाने का कारोबार? चेन्नई में पुलिस की छापेमारी के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय के नाम की कथित मुहरें, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अमेरिकी वीजा से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। छह आरोपी गिरफ्तार हुए हैं।

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से फर्जी दस्तावेज बनाने और बेचने के कथित बड़े रैकेट का मामला सामने आया है। एन्नोर इलाके में पुलिस ने छापेमारी कर छह लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये लोग सरकारी मुहरों, शैक्षणिक प्रमाणपत्रों और दूसरे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की नकल तैयार करके बेचने का काम कर रहे थे। बरामद सामग्री में प्रधानमंत्री कार्यालय यानी PMO के नाम की कथित मुहरें और अमेरिका के वीजा से जुड़े दस्तावेज तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी शामिल बताई गई है।

पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई एक गुप्त सूचना मिलने के बाद की गई। एन्नोर पुलिस ने विम्को नगर के अंबेडकर नगर स्थित फोर्थ स्ट्रीट पर एक कार्यालय की तलाशी ली। बताया जा रहा है कि इस कार्यालय में तमिलनाडु सरकार के विभिन्न विभागों, तालुक कार्यालयों और दूसरे सरकारी प्रतिष्ठानों के नाम वाली कथित नकली मुहरें रखी गई थीं।

तलाशी के दौरान पुलिस को 300 से अधिक संदिग्ध फर्जी मुहरें मिलीं। इसके अलावा, दस्तावेज तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली प्रिंटिंग मशीनें, प्रिंटर और अन्य उपकरण भी जब्त किए गए। पुलिस ने ऐसी सामग्री भी बरामद करने की बात कही है, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर अमेरिकी वीजा से संबंधित दस्तावेज तैयार करने में किया जा सकता था।

मेडिकल कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों के नाम पर भी कथित फर्जीवाड़ा
इस मामले में सबसे गंभीर पहलू शैक्षणिक प्रमाणपत्रों से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, छापेमारी में ऐसे प्रमाणपत्र भी मिले, जो कथित तौर पर मेडिकल कॉलेजों, सरकारी आर्ट्स कॉलेजों और निजी शैक्षणिक संस्थानों के नाम पर तैयार किए गए थे।

यदि जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल नकली मुहरें बनाने तक सीमित नहीं रहेगा। फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल नौकरी पाने, दाखिला लेने या दूसरे लाभ हासिल करने के लिए किया गया या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।

पुलिस ने जब्त सामग्री में कथित नकली 500 रुपये के नोटों और नकली मुद्रा बनाने से जुड़ी होने के संदेह वाली प्रिंटिंग सामग्री का भी उल्लेख किया है। हालांकि, इन सामग्रियों की वास्तविक प्रकृति और उनके इस्तेमाल के बारे में अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।

छह आरोपी गिरफ्तार, दस साल से कारोबार चलाने का आरोप
गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान करुणाकरन, स्टीफन उर्फ जयकुमार, जॉनसन, विक्टर, करुणानिधि और सत्यामूर्ति के रूप में बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, सभी आरोपी एन्नोर के एरानिस्वरर मंदिर इलाके के निवासी हैं।

प्रारंभिक पूछताछ में कथित तौर पर पता चला कि यह समूह करीब दस वर्षों से फर्जी सरकारी दस्तावेज और शैक्षणिक प्रमाणपत्र तैयार करने तथा जारी करने के काम में शामिल था। पुलिस अब इस कथित नेटवर्क के काम करने के तरीके, दस्तावेजों की बिक्री और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

पांच लाख से अधिक लोगों तक दस्तावेज पहुंचने की आशंका?
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि क्या इस कथित रैकेट के माध्यम से दस वर्षों में पांच लाख से अधिक लोगों तक फर्जी प्रमाणपत्र पहुंचाए गए। फिलहाल यह संख्या जांच के दायरे में है और इसे प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।

पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या किसी व्यक्ति ने कथित फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर सरकारी विभागों, चिकित्सा संस्थानों या अन्य संगठनों में नौकरी हासिल की। इसके अलावा, क्या इन दस्तावेजों के जरिए शैक्षणिक प्रवेश या अन्य सुविधाएं प्राप्त की गईं, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।

अब किन सवालों के जवाब तलाश रही है पुलिस?
फिलहाल पुलिस का ध्यान इस कथित नेटवर्क के पूरे दायरे का पता लगाने पर है। जांचकर्ताओं को यह स्थापित करना है कि कितने लोगों ने ऐसे दस्तावेज खरीदे, इस कारोबार से कितनी कमाई हुई और क्या इसके पीछे कोई अन्य व्यक्ति या संगठित गिरोह भी सक्रिय था।

चेन्नई में हुई इस कार्रवाई ने सरकारी दस्तावेजों, शैक्षणिक प्रमाणपत्रों और आधिकारिक मुहरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, बरामद सामग्री और गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े सभी आरोपों की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।

अब देखना होगा कि पुलिस की जांच में इस कथित रैकेट से जुड़े और कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं।