पुणे पोर्श हादसा: सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल को दी जमानत

Tue 10-Mar-2026,11:59 PM IST +05:30

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पुणे पोर्श हादसा: सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल को दी जमानत Pune Porsche Accident Case
  • सुप्रीम कोर्ट ने पुणे पोर्श केस में आरोपी के पिता को जमानत दी।

  • रक्त के नमूने बदलने की साजिश के आरोप में हुई थी गिरफ्तारी।

  • अदालत ने गवाहों से संपर्क न करने और ट्रायल जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।

Maharashtra / Pune :

Pune / सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (10 मार्च 2026) को 2024 के चर्चित पुणे पोर्श हादसे से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए नाबालिग आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल को जमानत दे दी। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने बेटे को बचाने के लिए उसके रक्त के नमूनों में कथित तौर पर हेरफेर करने की साजिश रची थी, ताकि मेडिकल रिपोर्ट में “शून्य अल्कोहल” दिखाया जा सके।

यह हादसा 19 मई 2024 को पुणे के कल्याणी नगर इलाके में हुआ था। आरोप है कि शराब के नशे में 17 वर्षीय लड़का पोर्श कार चला रहा था और उसकी तेज रफ्तार कार ने मोटरसाइकिल सवार दो आईटी पेशेवरों को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जिसके बाद पूरे देश में गुस्सा और बहस शुरू हो गई थी।

न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान की पीठ ने विशाल अग्रवाल को जमानत देते हुए कहा कि वह पिछले 22 महीनों से जेल में हैं और इस आधार पर उन्हें राहत दी जा सकती है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत निचली अदालत द्वारा तय शर्तों के अधीन होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी गवाह से संपर्क नहीं करेगा। यदि जमानत की शर्तों का उल्लंघन हुआ तो राज्य सरकार को जमानत रद्द करने का अधिकार होगा। इसके साथ ही अदालत ने संबंधित निचली अदालत को मामले की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी करने का निर्देश भी दिया।

सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार ने जमानत का विरोध किया। राज्य की ओर से कहा गया कि इस मामले में समानता का सिद्धांत लागू नहीं किया जा सकता क्योंकि आरोपी ने कथित तौर पर अधिकारियों को रिश्वत देने के लिए अपनी पत्नी के माध्यम से लगभग पांच लाख रुपये जुटाए थे, ताकि रक्त के नमूनों में हेरफेर कर अनुकूल मेडिकल रिपोर्ट तैयार करवाई जा सके।

वहीं आरोपी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने अदालत को बताया कि कार नाबालिग चला रहा था, लेकिन उसके साथ एक ड्राइवर भी मौजूद था जिसे वाहन चलाने के लिए रखा गया था।

पीड़ितों में से एक के पिता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि यह मामला सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं बल्कि न्याय व्यवस्था को कमजोर करने की साजिश का मामला है। उन्होंने अदालत से समाज को कड़ा संदेश देने की अपील की।

इस पर न्यायमूर्ति नागरत्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल समाज को संदेश देने के आधार पर किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता छीनना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष को अदालत में मुकदमे की प्रक्रिया के जरिए दोष सिद्ध करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान यह भी टिप्पणी की कि यह मामला भारतीय समाज की उस मानसिकता को दर्शाता है, जहां लोग अक्सर कानून से बचने की कोशिश करते हैं। अदालत ने शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि बच्चों में संवैधानिक मूल्यों को विकसित करना बेहद जरूरी है।

इस मामले में पहले भी कई आरोपियों को राहत मिल चुकी है। 27 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने रक्त के नमूनों में कथित छेड़छाड़ के आरोप में गिरफ्तार एक डॉक्टर को जमानत दी थी। वहीं 2 फरवरी को भी तीन आरोपियों को जमानत दी गई थी।

पुणे पोर्श हादसा देशभर में उस समय सुर्खियों में आया था जब किशोर न्याय बोर्ड ने नाबालिग आरोपी को बेहद हल्की शर्तों पर जमानत दे दी थी, जिसमें सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखना भी शामिल था। इस फैसले के बाद पूरे देश में भारी आक्रोश देखने को मिला था।

बाद में पुणे पुलिस के आग्रह पर किशोर न्याय बोर्ड ने अपने आदेश में संशोधन किया और नाबालिग को निगरानी गृह भेजा गया। बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसे रिहा करने का आदेश दिया। फिलहाल इस मामले में कई आरोपी न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं और अदालत ने ट्रायल जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं।