भारतीय सेना ने शुरू किया ‘भारत चावल’, राजनाथ सिंह ने बताया सैन्य रसद का महत्व

Mon 12-Oct-2026,08:46 PM IST +05:30

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भारतीय सेना ने शुरू किया ‘भारत चावल’, राजनाथ सिंह ने बताया सैन्य रसद का महत्व Indian Army News
  • भारतीय सेना ने सैनिकों के लिए ‘भारत चावल’ पहल शुरू की।

  • सेना और एफसीआई के बीच आपातकालीन रसद सहयोग के लिए समझौता हुआ।

  • चावल 10 और 30 किलो के पैकेट में लद्दाख और पूर्वोत्तर के डिपो तक पहुंचाया जाएगा।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / सीमा पर तैनात सैनिकों तक बेहतर राशन पहुंचाने के लिए भारतीय सेना ने एक नई पहल शुरू की है। लेकिन इस व्यवस्था में चावल के साथ-साथ देश के गोदाम और परिवहन नेटवर्क भी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती देंगे। जानिए पूरी खबर।

भारतीय सेना ने 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में ‘भारत चावल’ पहल की शुरुआत की। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी मौजूद रहे। इस पहल का उद्देश्य सैनिकों को उच्च गुणवत्ता वाला चावल उपलब्ध कराना और विशेष रूप से दूरस्थ तथा दुर्गम क्षेत्रों में राशन की आपूर्ति को आसान बनाना है।

कार्यक्रम के दौरान भारतीय सेना और भारतीय खाद्य निगम यानी एफसीआई के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत परिचालन संबंधी आपात परिस्थितियों में सेना एफसीआई के चिन्हित गोदामों, भंडारण सुविधाओं, श्रम संसाधनों और सामग्री संभालने वाले उपकरणों का उपयोग कर सकेगी। यह समझौता पांच वर्षों के लिए वैध रहेगा, जिसे आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकता है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘भारत चावल’ को किसान के खेत से सैनिक की थाली तक पहुंचने वाले भरोसे का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल ‘जय जवान, जय किसान’ की भावना को साकार करती है। उनके अनुसार, सैनिकों की परिचालन क्षमता केवल हथियारों और उपकरणों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि पौष्टिक भोजन, शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्थिरता और मजबूत मनोबल भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध में रसद व्यवस्था बेहद अहम है। हथियारों और तकनीक के साथ-साथ आपूर्ति श्रृंखला, भंडारण क्षमता, परिवहन नेटवर्क और समय पर जरूरी सामग्री पहुंचाना भी सैन्य तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य में संघर्ष की परिस्थितियां कम चेतावनी समय में उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए आपूर्ति नेटवर्क को मजबूत बनाना आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि एफसीआई के पास देशभर में गोदाम, आधुनिक साइलो, भंडारण सुविधाएं और प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध हैं। इन संसाधनों का जरूरत के समय सैन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग करने से समय की बचत होगी और आपूर्ति व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सकेगी। यह नागरिक और सैन्य जरूरतों के लिए राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे के साझा उपयोग का उदाहरण है।

‘भारत चावल’ की आपूर्ति वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ यानी नेफेड के माध्यम से की जाएगी। चावल को निर्धारित रक्षा मानकों के अनुसार तैयार किया जाएगा और उसकी गुणवत्ता की जांच की जाएगी। इसमें विदेशी पदार्थों और मिलावट को रोकने के साथ टूटे, क्षतिग्रस्त और बदरंग दानों की मात्रा न्यूनतम रखने पर ध्यान दिया जाएगा। चावल 10 और 30 किलोग्राम के थैलों में उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि इसे उठाना और अग्रिम चौकियों तक पहुंचाना आसान हो।

इस पहल के तहत चावल सीधे सेना के आपूर्ति डिपो तक पहुंचाया जाएगा। इसमें लद्दाख और पूर्वोत्तर के दूरस्थ क्षेत्रों के डिपो भी शामिल हैं। सेना के डिपो स्थानीय एफसीआई गोदामों से इसे स्वयं उठाने के बजाय निर्धारित आपूर्ति व्यवस्था के माध्यम से प्राप्त करेंगे।

कार्यक्रम में प्रल्हाद जोशी ने कहा कि देश की रक्षा करने वाले सैनिकों को गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना सरकार के लिए गर्व और जिम्मेदारी का विषय है। इस अवसर पर सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और रक्षा, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालयों, एफसीआई तथा नेफेड के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

कुल मिलाकर, ‘भारत चावल’ पहल सैनिकों के राशन की गुणवत्ता सुधारने के साथ सैन्य रसद व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। एफसीआई के साथ हुआ समझौता आपात परिस्थितियों में भंडारण और वितरण क्षमता का बेहतर उपयोग करने में मदद करेगा।