Rajnath Singh Announces | IIT कानपुर में बनेगा सैन्य ड्रोन टेक्नोलॉजी सेंटर? राजनाथ सिंह का बड़ा ऐलान!
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Rajnath Singh Announces IIT Kanpur Drone Center
आईआईटी कानपुर में राष्ट्रीय सैन्य ड्रोन प्रौद्योगिकी केंद्र के प्रस्ताव की मंजूरी प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
राजनाथ सिंह ने एआई, ड्रोन, साइबर सुरक्षा और स्वदेशी रक्षा तकनीक के विकास पर जोर दिया।
आईआईटी कानपुर का लक्ष्य मार्च 2029 तक एक अरब अमेरिकी डॉलर जुटाना है।
Kanpur / भविष्य की जंग सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और साइबर तकनीक से भी लड़ी जाएगी! ऐसे में भारत अपनी रक्षा ताकत कैसे बढ़ाने जा रहा है? रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने IIT कानपुर से जुड़ी बड़ी पहल की जानकारी दी है।
भारत की रक्षा तकनीक को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम पहल सामने आई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सशस्त्र बलों, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ, शैक्षणिक संस्थानों और निजी उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है। उन्होंने 14 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आईआईटी कानपुर के ‘ग्रेटर दैन अस’ धन-संग्रह अभियान की शुरुआत के दौरान कहा कि बदलते युद्ध के स्वरूप को देखते हुए स्वदेशी रक्षा तकनीकों का विकास और उनमें लगातार सुधार बेहद जरूरी है।
युद्ध के बदलते स्वरूप के लिए नई तकनीक जरूरी
रक्षा मंत्री के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वायत्त प्रणालियां, मानव रहित प्लेटफॉर्म, उन्नत सेंसर, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष आधारित तकनीकें सैन्य अभियानों को तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में भारत को केवल विदेशी तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि आईआईटी जैसे संस्थान वैज्ञानिक अनुसंधान को सेना और रक्षा उद्योग की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
IIT कानपुर में सैन्य ड्रोन तकनीक पर विशेष जोर
इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने आईआईटी कानपुर में स्थापित डीआरडीओ-उद्योग-अकादमिक उत्कृष्टता केंद्र की सराहना की। उन्होंने संस्थान में स्कूल ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजीज स्थापित करने के प्रस्ताव का भी स्वागत किया। इसके अलावा, रक्षा मंत्रालय के सहयोग से आईआईटी कानपुर में ‘राष्ट्रीय सैन्य ड्रोन प्रौद्योगिकी केंद्र’ स्थापित करने के प्रस्ताव पर महत्वपूर्ण प्रगति की जानकारी दी गई। राजनाथ सिंह के अनुसार, इस प्रस्ताव को मंजूरी देने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
इस केंद्र का उद्देश्य स्वदेशी ड्रोन तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देना तथा युद्धक्षेत्र में भारत की तकनीकी बढ़त मजबूत करने में मदद करना है।
IIT इकोसिस्टम से हजारों स्टार्टअप को बढ़ावा
रक्षा मंत्री ने बताया कि आईआईटी इकोसिस्टम ने 6,000 से अधिक स्टार्टअप, 56 यूनिकॉर्न और लगभग 5,000 पेटेंट को सहयोग देने में योगदान किया है। उनके अनुसार, आईआईटी अब केवल शिक्षा के केंद्र नहीं हैं, बल्कि नवाचार, उद्यमिता और तकनीकी विकास के महत्वपूर्ण आधार भी बन रहे हैं।
उन्होंने साइबर सुरक्षा, मेडिकल तकनीक, सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी और उन्नत सामग्री जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जोड़ने की जरूरत पर भी बल दिया।
एक लाख करोड़ रुपये की अनुसंधान योजना
राजनाथ सिंह ने अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की एक लाख करोड़ रुपये की अनुसंधान, विकास एवं नवाचार योजना का भी उल्लेख किया। इसका उद्देश्य उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि सरकार अनुकूल माहौल तैयार कर सकती है, लेकिन नए विचारों को विकसित करने और उन्हें वास्तविक उपयोग में बदलने के लिए शिक्षण संस्थानों तथा उद्योगों को मिलकर काम करना होगा।
IIT कानपुर का एक अरब डॉलर जुटाने का लक्ष्य
आईआईटी कानपुर ने ‘ग्रेटर दैन अस’ अभियान के तहत मार्च 2029 तक एक अरब अमेरिकी डॉलर जुटाने का लक्ष्य रखा है। संस्थान के अनुसार, इस लक्ष्य की लगभग आधी राशि यानी 4,155 करोड़ रुपये जुटाने की प्रतिबद्धता पहले ही मिल चुकी है। इस धन का उपयोग अनुसंधान सुविधाओं को मजबूत करने, प्रतिभाओं को अवसर देने और स्वदेशी तकनीकों के विकास एवं व्यावसायीकरण को गति देने में किया जाएगा।
कुल मिलाकर, आईआईटी कानपुर की यह पहल शिक्षा, उद्योग और रक्षा क्षेत्र को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यदि इन प्रयासों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जाता है, तो इससे भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता, तकनीकी नवाचार और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को मजबूती मिल सकती है।