तरंग शक्ति-26: भारतीय वायु सेना की नई रणनीति, आधुनिक युद्ध और AI तकनीक पर मंथन

Mon 12-Oct-2026,09:12 PM IST +05:30

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तरंग शक्ति-26: भारतीय वायु सेना की नई रणनीति, आधुनिक युद्ध और AI तकनीक पर मंथन Tarang Shakti 2026
  • तरंग शक्ति-26 के दौरान नई दिल्ली में वायु शक्ति पर संगोष्ठी आयोजित हुई।

  • भारतीय वायु सेना प्रमुख एपी सिंह ने आधुनिक तकनीक और एकीकृत सैन्य क्षमताओं पर जोर दिया।

  • विशेषज्ञों ने भविष्य के हवाई युद्ध, सूचना युद्ध और अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग पर चर्चा की।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / आधुनिक युद्ध में अब सिर्फ लड़ाकू विमान और मिसाइलें ही जीत तय नहीं करतीं, बल्कि डेटा नेटवर्क, मानवरहित विमान और सटीक रणनीति भी निर्णायक बन रहे हैं। आखिर बदलते युद्धक्षेत्र में वायु सेनाएं अपनी ताकत कैसे बढ़ा रही हैं?

भारत की वायु सुरक्षा और भविष्य के युद्ध की रणनीतियों को लेकर नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी आयोजित की गई। सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रेटेजिक स्टडीज यानी सीएपीएसएस ने भारतीय वायु सेना के साथ मिलकर 9 अक्टूबर 2026 को सुब्रतो पार्क स्थित वायु सेना सभागार में इस कार्यक्रम का आयोजन किया। यह संगोष्ठी तरंग शक्ति-26 अभ्यास के दौरान आयोजित हुई, जिसका मुख्य विषय था—‘बदलते युद्धक्षेत्र में वायु शक्ति की केंद्रीय भूमिका’।

इस कार्यक्रम में विभिन्न महाद्वीपों की सहयोगी वायु सेनाओं के प्रतिनिधियों, वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, शिक्षाविदों, उद्योग जगत और मीडिया से जुड़े लोगों ने भाग लिया। चर्चा का प्रमुख उद्देश्य यह समझना था कि युद्ध की बदलती प्रकृति के बीच वायु शक्ति किस तरह नई तकनीकों, रणनीतियों और परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप खुद को विकसित कर रही है।

सीएपीएसएस के महानिदेशक एयर मार्शल नागेश कपूर सेवानिवृत्त ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने आधुनिक संघर्षों में वायु शक्ति के महत्व और रणनीतिक अध्ययन के क्षेत्र में संस्थान के योगदान पर प्रकाश डाला। उल्लेखनीय है कि सीएपीएसएस की स्थापना वर्ष 2001 में राष्ट्रीय सुरक्षा, परमाणु और अंतरिक्ष संबंधी विषयों पर अनुसंधान एवं विश्लेषण के लिए की गई थी। वर्ष 2026 संस्थान की रजत जयंती का वर्ष भी है।

भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने उद्घाटन संबोधन में कहा कि भविष्य की हवाई चुनौतियों से निपटने के लिए एकीकृत क्षमताओं, परिचालन मजबूती और सहयोगी वायु सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता है। उन्होंने मानवयुक्त और मानवरहित अभियानों के समन्वित विकास पर जोर दिया। साथ ही, सेंसर, हथियार प्रणालियों और मानवरहित प्लेटफॉर्मों को संचार तथा डेटा नेटवर्क से शुरुआत से ही जोड़ने की आवश्यकता बताई।

वायु सेना प्रमुख ने आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने, प्रशिक्षण के नए तरीके अपनाने और लंबे समय तक चलने वाले अभियानों के लिए तैयारियों को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वायु शक्ति की भूमिका केवल युद्ध तक सीमित नहीं है। मानवीय सहायता, सहयोगी देशों को समर्थन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा को मजबूत करने में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने सूचना युद्ध, धारणा प्रबंधन और परिचालन अनुभवों को साझा करने की जरूरत पर भी प्रकाश डाला।

संगोष्ठी के पहले सत्र की अध्यक्षता पूर्व वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वी.आर. चौधरी ने की। इसमें 21वीं सदी में हवाई युद्ध के बदलते स्वरूप पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि वायु शक्ति अब केवल आकाश पर नियंत्रण स्थापित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें युद्धक्षेत्र की स्थिति को समझना, तेजी से निर्णय लेना और व्यापक परिचालन व्यवस्था को प्रभावी बनाना भी शामिल है। चर्चा में मीडिया की रणनीतिक भूमिका पर भी विचार किया गया।

दूसरे सत्र की अध्यक्षता रॉयल ऑस्ट्रेलियाई वायु सेना के प्रमुख एयर मार्शल स्टीफन चैपल ने की। इसमें राष्ट्रीय रणनीति के हिस्से के रूप में वायु शक्ति की भूमिका का विश्लेषण किया गया। निवारण, दबाव, तनाव नियंत्रण और मानव संसाधन विकास जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। विशेषज्ञों ने भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप वायु सेनाओं की क्षमताओं में सुधार और संघर्ष की तीव्रता को नियंत्रित करने में वायु शक्ति के योगदान पर भी चर्चा की।

कुल मिलाकर, तरंग शक्ति-26 के दौरान आयोजित यह संगोष्ठी आधुनिक हवाई युद्ध, तकनीकी एकीकरण और अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग की दिशा में विचार साझा करने का महत्वपूर्ण मंच बनी। इससे भविष्य की चुनौतियों के लिए वायु सेनाओं की तैयारी और सहयोग को बेहतर बनाने पर नए दृष्टिकोण सामने आए।