छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों पर सख्ती, SCERT-NCERT किताबें अनिवार्य

Fri 24-Apr-2026,01:50 PM IST +05:30

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छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों पर सख्ती, SCERT-NCERT किताबें अनिवार्य Chhattisgarh-Private-Schools-New-Rules-Scert-NCERT
  • छत्तीसगढ़ सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए SCERT और NCERT किताबों को अनिवार्य किया, जिससे छात्रों और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम होगा।

  • अब कोई भी स्कूल अभिभावकों को तय दुकानों से यूनिफॉर्म या स्टेशनरी खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा, इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है।

  • नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई होगी और जिला कलेक्टरों को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

Chhattisgarh / Raipur :

Raipur/ छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों की मनमानी और बढ़ते खर्च को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं कि सभी प्राइवेट स्कूलों को तय नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। School Education Department Chhattisgarh के इस फैसले का उद्देश्य शिक्षा को किफायती और पारदर्शी बनाना है। जिला कलेक्टरों को इन नियमों की सख्ती से निगरानी करने की जिम्मेदारी दी गई है।

जारी आदेश के अनुसार, छत्तीसगढ़ बोर्ड से जुड़े निजी स्कूलों में कक्षा 1 से 10वीं तक केवल SCERT की किताबों से ही पढ़ाई कराई जाएगी। ये किताबें राज्य पाठ्य पुस्तक निगम के माध्यम से छात्रों को नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। वहीं, CBSE से संबद्ध स्कूलों के लिए NCERT पाठ्यक्रम को अनिवार्य किया गया है।

सरकार को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई निजी स्कूल अभिभावकों को महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए मजबूर करते हैं। इस पर रोक लगाने के लिए यह कदम उठाया गया है। खासतौर पर कक्षा 1 से 8वीं तक लागू शिक्षा का अधिकार अधिनियम को ध्यान में रखते हुए यह सुनिश्चित किया गया है कि बच्चों की पढ़ाई बिना आर्थिक बोझ के हो।

इसके अलावा, सरकार ने यूनिफॉर्म और स्टेशनरी को लेकर भी सख्त निर्देश दिए हैं। अब कोई भी स्कूल अभिभावकों को किसी एक विशेष दुकान से सामान खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा। पहले ऐसी शिकायतें सामने आती थीं कि स्कूल प्रबंधन तय दुकानों से ही खरीदारी का दबाव बनाते थे, जिससे अभिभावकों को अधिक कीमत चुकानी पड़ती थी।

स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी निजी स्कूलों को यह भी निर्देश दिया है कि वे शिकायतों के समाधान के लिए एक पारदर्शी प्रणाली विकसित करें। छात्रों और अभिभावकों की समस्याओं का समय पर समाधान सुनिश्चित करना अब स्कूलों की जिम्मेदारी होगी।

सरकार ने साफ चेतावनी दी है कि इन नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश की जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई है, जिससे इसकी गंभीरता स्पष्ट होती है।

इस फैसले से अभिभावकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। किताबों, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सामग्री पर होने वाले अनावश्यक खर्च में कमी आएगी और शिक्षा अधिक सुलभ बनेगी। अब नजर इस बात पर रहेगी कि निजी स्कूल इन निर्देशों को किस हद तक लागू करते हैं।