JNU में टकराव: रोहित वेमुला एक्ट, UGC नियमों पर बवाल, छात्र हिरासत और प्रशासन की चेतावनी

Fri 27-Feb-2026,01:35 PM IST +05:30

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JNU Protest
  • रोहित वेमुला एक्ट को लेकर जेएनयू में छात्र आंदोलन.

  • मार्च रोकने के लिए पुलिस, आरएएफ और सीआरपीएफ तैनात.

  • 50 से अधिक छात्र हिरासत में, प्रशासन की चेतावनी जारी.

Delhi / Delhi :

Delhi / दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) एक बार फिर तीखे विवाद और छात्र आंदोलन के केंद्र में आ गई है। छात्रसंघ ने रोहित वेमुला एक्ट को लागू करने और संशोधित यूजीसी नियमों के विरोध में कैंपस से शिक्षा मंत्रालय तक लॉन्ग मार्च निकालने का ऐलान किया था। जैसे ही छात्रों ने मार्च की तैयारी शुरू की, विश्वविद्यालय परिसर में तनाव बढ़ गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस के साथ-साथ आरएएफ और सीआरपीएफ की भी तैनाती की गई।

मार्च को आगे बढ़ने से रोकने के दौरान धक्का-मुक्की और झड़प की खबरें सामने आईं। इस दौरान 50 से अधिक छात्रों को हिरासत में लिया गया। छात्रसंघ अध्यक्ष अदिती, सचिव गोपिका, महासचिव दानिश और एआईएसए की अध्यक्ष नेहा समेत कई छात्र नेताओं को करीब 15 घंटे तक पुलिस हिरासत में रखा गया। बताया जा रहा है कि कुछ छात्र घायल भी हुए हैं। फिलहाल 14 छात्र अब भी पुलिस की गिरफ्त में हैं। कैंपस के बाहर और अंदर भारी पुलिस बल तैनात है और माहौल संवेदनशील बना हुआ है।

दूसरी ओर, जेएनयू प्रशासन ने 26 फरवरी की रात अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर बयान जारी कर प्रदर्शन को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत बताया। प्रशासन का कहना है कि जिन यूजीसी नियमों को लागू करने की मांग की जा रही है, उन पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा रखी है और विश्वविद्यालय के कुलपति या रजिस्ट्रार के पास इस मामले में कोई अधिकार नहीं है। प्रशासन ने यह भी आरोप लगाया कि छात्रसंघ सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और हिंसा से जुड़े निष्कासन के मूल मुद्दे से ध्यान भटका रहा है। जांच के बाद जिन छात्रों को दोषी पाया गया, उन्हें निष्कासित किया गया है।

बयान में यह भी कहा गया कि जेएनयू एक सार्वजनिक विश्वविद्यालय है, जो सरकार, संसद और करदाताओं के प्रति जवाबदेह है। प्रशासन ने महिला ओबीसी कुलपति पर लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए इसे गंभीर और निंदनीय बताया।

वहीं छात्रसंघ का आरोप है कि यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब कुलपति की ओर से कथित तौर पर जातिगत टिप्पणियां की गईं। साथ ही विश्वविद्यालय के फंड में कटौती, पदाधिकारियों के निष्कासन और रोहित वेमुला एक्ट के साथ संशोधित यूजीसी नियम लागू करने की मांग को लेकर आंदोलन तेज हुआ। छात्रों का कहना है कि उनकी आवाज दबाने के लिए बल प्रयोग किया गया।

कुल मिलाकर, जेएनयू में हालात अभी शांत नहीं हुए हैं। प्रशासन और छात्रसंघ अपने-अपने पक्ष पर अड़े हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि बातचीत और समाधान का रास्ता कब और कैसे निकलता है।