गेहूं खरीदी मुद्दे पर कांग्रेस आक्रामक, जीतू पटवारी ने सरकार को घेरा
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भोपाल में सेवादल कार्यकर्ताओं का अनशन खत्म कर जीतू पटवारी ने गेहूं खरीदी में देरी को लेकर सरकार पर भ्रष्टाचार और किसान विरोधी नीति का आरोप लगाया।
कांग्रेस ने सरकार को 8 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर प्रदेशभर में चक्काजाम और उग्र आंदोलन किया जाएगा।
2700 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं की मांग के साथ कांग्रेस ने किसानों के हितों को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और जवाब मांगा।
Bhopal/ मध्य प्रदेश में गेहूं उपार्जन को लेकर बढ़ते असंतोष के बीच कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राजधानी Bhopal में पिछले 24 घंटे से उपवास पर बैठे सेवादल कार्यकर्ताओं का अनशन समाप्त कराने के लिए Jitu Patwari पहुंचे। उन्होंने सेवादल प्रदेश अध्यक्ष अवनीश भार्गव सहित अन्य कार्यकर्ताओं को जूस पिलाकर उपवास तुड़वाया और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
मीडिया से बातचीत में पटवारी ने कहा कि गेहूं खरीदी में जानबूझकर देरी की गई, जिससे किसान मजबूरी में अपनी फसल कम दामों पर बेचने को विवश हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी प्रक्रिया एक बड़े घोटाले की ओर इशारा करती है। उनके अनुसार, राज्य की पहचान अब विकास नहीं बल्कि “भ्रष्टाचार के कैंसर” से होने लगी है।
पटवारी ने कहा कि सरकार किसानों के हितों की अनदेखी कर रही है और गेहूं उपार्जन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने “मोदी की गारंटी” के तहत 2700 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं की कीमत सुनिश्चित करने की मांग दोहराई।
इस दौरान कांग्रेस नेता ने राज्य सरकार को 8 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो पार्टी पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि सबसे पहले बॉम्बे-आगरा रोड को जाम किया जाएगा, जिसके बाद हर जिले में नेशनल हाईवे पर चक्काजाम होगा।
पटवारी ने यह भी ऐलान किया कि कांग्रेस कार्यकर्ता कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan के बंगले के सामने भी उपवास करेंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि केंद्र सरकार से गेहूं खरीदी का कोटा बढ़ाने के लिए समय रहते पहल क्यों नहीं की गई।
इसके अलावा महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी उन्होंने केंद्र सरकार को घेरा और कहा कि इस विषय पर कांग्रेस पहले से ही गंभीर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल से जुड़े प्रभावशाली लोग अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
कुल मिलाकर, गेहूं उपार्जन और किसान हितों को लेकर यह मुद्दा अब प्रदेश की राजनीति में बड़ा विषय बनता जा रहा है, जिस पर आने वाले दिनों में और तेज टकराव देखने को मिल सकता है।