उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने AIIMS ऋषिकेश दीक्षांत में सेवा और नवाचार पर दिया जोर
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
VP-Radhakrishnan-Aiims-Rishikesh-Convocation
उपराष्ट्रपति ने AIIMS ऋषिकेश दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए इसे जिम्मेदारी की शुरुआत बताया और समर्पण व सेवा भावना से काम करने का आह्वान किया।
कोविड-19 में भारत की सफलता, 140 करोड़ टीकाकरण और ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल का जिक्र करते हुए वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका को सराहा गया।
उत्तराखंड/ C. P. Radhakrishnan ने AIIMS Rishikesh के छठे दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए इसे जीवन का निर्णायक मोड़ बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल शैक्षणिक उपलब्धि का उत्सव नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभाने की शुरुआत है। उन्होंने स्नातक छात्रों से अपने पेशे में समर्पण, ईमानदारी और उद्देश्य के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने Narendra Modi के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश ने लचीलापन, नवाचार और प्रतिबद्धता का उदाहरण पेश किया। भारत के व्यापक टीकाकरण अभियान का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि 140 करोड़ से अधिक नागरिकों को मुफ्त टीके लगाए गए, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित हुई।
उन्होंने भारत की ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल को वैश्विक सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण बताया, जिसके तहत 100 से अधिक देशों को टीके उपलब्ध कराए गए। यह पहल ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को साकार करती है और भारत को एक जिम्मेदार वैश्विक साझेदार के रूप में स्थापित करती है।
स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक में देशभर में नए एम्स संस्थानों की स्थापना से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि सुशासन का मूल उद्देश्य लोगों की जरूरतों को समझकर उन्हें बेहतर सेवाएं प्रदान करना है।
एम्स ऋषिकेश की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह संस्थान नैदानिक देखभाल, अनुसंधान, शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने विशेष रूप से टेलीमेडिसिन सेवाओं की प्रशंसा की, जो दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
इसके साथ ही, उन्होंने हेलीकॉप्टर आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और ड्रोन के माध्यम से दवा वितरण जैसी आधुनिक पहलों को भी सराहा। उन्होंने कहा कि ये नवाचार स्वास्थ्य सेवा की पुरानी चुनौतियों को दूर करने में कारगर साबित हो रहे हैं।
उपराष्ट्रपति ने उत्तराखंड में तेजी से हो रहे बुनियादी ढांचे के विकास, विशेष रूप से दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उल्लेख करते हुए राज्य सरकार के प्रयासों की प्रशंसा की।
समारोह में Pushkar Singh Dhami, Anupriya Patel सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
अंत में, उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा केवल पेशा नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा का माध्यम है और चिकित्सा पेशेवरों को सहानुभूति, सत्यनिष्ठा और सेवा भावना के साथ कार्य करना चाहिए।