स्वच्छता ही सेवा 2026: रक्षा लेखा विभाग ने लगाए 25 हजार से अधिक पौधे!
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Swachhata Hi Seva 2026
रक्षा लेखा विभाग ने देशभर में 25 हजार से अधिक पौधे लगाए।
दिल्ली के बगडोला स्थित एमसीडी प्राथमिक विद्यालय में स्वच्छता अभियान आयोजित हुआ।
विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 में कचरा प्रबंधन और पुनर्चक्रण पर जोर दिया गया।
New Delhi / देश को स्वच्छ बनाने और पर्यावरण बचाने की मुहिम में रक्षा लेखा विभाग ने एक बड़ी पहल की है! हजारों पौधे लगाने से लेकर सरकारी कार्यालयों के कचरे के निपटान तक, आखिर इस अभियान के पीछे क्या है खास और कैसे बदलेगी तस्वीर?
स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए रक्षा लेखा विभाग ने देशभर में विशेष अभियान चलाया है। ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान के तहत विभाग के विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों में श्रमदान कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान दो सप्ताह तक चले स्वच्छता पखवाड़े में अधिकारियों और कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। वहीं, ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के तहत देशभर में 25 हजार से अधिक पौधे लगाए गए। इस पहल का उद्देश्य केवल आसपास की सफाई करना नहीं, बल्कि लोगों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और स्वच्छता की आदत को मजबूत बनाना भी है।
दिल्ली के विद्यालय में हुआ अभियान का समापन
रक्षा लेखा विभाग के इस अभियान का समापन नई दिल्ली के द्वारका स्थित बगडोला के एमसीडी प्राथमिक विद्यालय में आयोजित स्वच्छता कार्यक्रम के साथ हुआ। यह कार्यक्रम दिल्ली नगर निगम के सहयोग से आयोजित किया गया। अभियान का नेतृत्व रक्षा लेखा महानियंत्रक यानी सीजीडीए श्रीमती अलका नांगिया अरोड़ा ने किया। इसमें सीजीडीए मुख्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर में स्वच्छता गतिविधियां संचालित की गईं और पौधरोपण भी किया गया। इस तरह सरकारी विभागों ने मिलकर स्वच्छता और हरियाली को बढ़ावा देने का संदेश दिया।
विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 के तहत भी पहल
इसी क्रम में विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 के तहत रक्षा लेखा महानियंत्रक मुख्यालय ने 12 अक्टूबर 2026 को पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया। इसके साथ ही कार्यालयों में पुराने दस्तावेजों, बंद की जाने वाली ई-फाइलों और अनुपयोगी सामग्री के निपटान की प्रक्रिया भी शुरू की गई।
विभाग ने ऐसी फाइलों की पहचान करने पर ध्यान दिया, जिन्हें नियमानुसार हटाया जा सकता है। साथ ही, कबाड़ और ई-कचरे को भी अलग से चिह्नित किया जा रहा है, ताकि उनका उचित तरीके से निपटान किया जा सके। यह कदम कार्यालयों को व्यवस्थित बनाने और अनावश्यक सामग्री के सुरक्षित प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण है। हालांकि, दस्तावेजों का निपटान निर्धारित नियमों के अनुसार ही किया जाना जरूरी है।
कम उपयोग, पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण पर जोर
रक्षा लेखा विभाग की इन पहलों में स्वच्छता के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। ‘कम उपयोग, पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण’ यानी रिड्यूस, रीयूज और रिसाइकिल के सिद्धांतों को बढ़ावा देना इस अभियान का अहम हिस्सा है। इसका मतलब है कि संसाधनों का इस्तेमाल सोच-समझकर किया जाए, उपयोगी वस्तुओं को दोबारा काम में लाया जाए और कचरे को उचित प्रक्रिया से पुनर्चक्रित किया जाए। इससे कचरे की मात्रा कम करने और पर्यावरण पर पड़ने वाले दबाव को घटाने में मदद मिल सकती है।
देशभर में आयोजित श्रमदान और पौधरोपण कार्यक्रम यह संदेश देते हैं कि स्वच्छता केवल किसी एक विभाग या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें सरकारी कार्यालयों, स्थानीय निकायों और आम नागरिकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। कुल मिलाकर, रक्षा लेखा विभाग की यह पहल स्वच्छता, हरियाली और जिम्मेदार कचरा प्रबंधन को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास है। इन अभियानों की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पौधों की देखभाल, नियमित सफाई और कचरे के उचित निपटान की प्रक्रिया आगे भी लगातार जारी रहे।