शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने सभी मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
इस नए मंत्रिमंडल में NDA के सभी प्रमुख सहयोगी दलों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। Bharatiya Janata Party, Janata Dal (United), Lok Janshakti Party (Ram Vilas), Hindustani Awam Morcha और आरएलएम के नेताओं को शामिल कर सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की गई है। बीजेपी कोटे से रामकृपाल यादव, नीतीश मिश्रा और दिलीप जायसवाल जैसे बड़े नेताओं को जगह मिली, जबकि जेडीयू से श्रवण कुमार, अशोक चौधरी, रत्नेश सदा और शीला कुमारी जैसे चेहरे शामिल हुए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कैबिनेट विस्तार सिर्फ सरकार का विस्तार नहीं, बल्कि आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया राजनीतिक संदेश भी है। खासतौर पर निशांत कुमार की एंट्री को लेकर काफी चर्चा हो रही है। लंबे समय तक राजनीति से दूरी बनाए रखने वाले निशांत अब सक्रिय भूमिका में नजर आ रहे हैं, जिससे बिहार की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है।
सम्राट चौधरी पिछले महीने नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री बने थे। नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए चुने गए और इसके बाद बिहार में नेतृत्व परिवर्तन हुआ। करीब 22 दिन बाद हुए इस कैबिनेट विस्तार ने साफ कर दिया है कि NDA बिहार में मजबूत और संतुलित सरकार का संदेश देना चाहती है।
गांधी मैदान में हुए इस शपथ ग्रहण समारोह में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक भी मौजूद रहे। पूरे आयोजन को शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा गया, जहां NDA ने एकजुटता और राजनीतिक मजबूती का संकेत देने की कोशिश की।