क्षेत्रीय कृषि रणनीति पर जोर, शिवराज सिंह चौहान ने दिया बड़ा रोडमैप
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नकली बीज और कीटनाशकों पर सख्त कानून, उर्वरक सब्सिडी और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं से किसानों को राहत देने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
दलहन-तिलहन में आत्मनिर्भरता, कृषि विविधीकरण और इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष फोकस किया गया।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि विकास के लिए क्षेत्रीय रणनीति पर जोर देते हुए स्थानीय जलवायु और संसाधनों के अनुसार नीति बनाने की आवश्यकता बताई।
लखनऊ/ उत्तर भारत की खेती को नई दिशा देने के उद्देश्य से लखनऊ में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने कृषि विकास के लिए क्षेत्रीय रणनीति पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब पूरे देश में एक समान नीति के बजाय स्थानीय जलवायु, जल उपलब्धता और फसली जरूरतों के आधार पर कृषि योजनाएं बनाई जाएंगी। इस सम्मेलन को केंद्र सरकार ने क्षेत्रीय समन्वय और व्यावहारिक समाधान का महत्वपूर्ण मंच बताया है।
लखनऊ में आयोजित इस सम्मेलन को देश को पांच कृषि क्षेत्रों में विभाजित कर आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों की श्रृंखला का हिस्सा बताया गया। मंत्री ने कहा कि अलग-अलग राज्यों की भौगोलिक और कृषि परिस्थितियां भिन्न हैं, इसलिए स्थानीय जरूरतों के अनुसार रणनीति बनाना समय की मांग है।
उन्होंने कहा कि कृषि राज्य का विषय है, इसलिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय बेहद जरूरी है। खरीफ और रबी फसलों के लिए साझा रोडमैप तैयार किया जा रहा है, जिसमें उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय सुधारने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सम्मेलन में दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता, कृषि विविधीकरण और बागवानी को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। मंत्री ने कहा कि भारत ने खाद्यान्न उत्पादन में रिकॉर्ड बनाया है, लेकिन पोषण सुरक्षा के लिए दलहन और तिलहन का उत्पादन बढ़ाना जरूरी है।
छोटे किसानों के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि सीमित जमीन में अधिक आय के लिए इंटरक्रॉपिंग, पशुपालन, मछली पालन और मधुमक्खी पालन जैसे विकल्प अपनाने होंगे। यह मॉडल किसानों की आय को स्थिर और टिकाऊ बना सकते हैं।
Kisan Credit Card योजना को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। मंत्री ने कहा कि हर पात्र किसान तक सस्ता कृषि ऋण पहुंचाना प्राथमिकता है, जिससे उत्पादन और निवेश दोनों बढ़ेंगे।
इसके साथ ही Farmer ID को कृषि प्रशासन में बड़ा बदलाव बताते हुए कहा गया कि इससे किसानों को योजनाओं का लाभ आसानी और पारदर्शिता से मिल सकेगा।
सरकार ‘लैब टू लैंड’ अभियान के तहत वैज्ञानिकों को गांवों तक पहुंचाकर आधुनिक तकनीक और शोध को खेतों तक पहुंचाने की योजना पर काम कर रही है। इससे किसानों को नई तकनीकों का लाभ मिलेगा।
उत्तर प्रदेश में आलू किसानों को राहत देने के लिए एमआईएस योजना के तहत खरीद की अनुमति दी गई है, साथ ही प्रसंस्करण और भंडारण सुविधाओं को मजबूत करने के लिए इंटरनेशनल प्रोसेसिंग सेंटर स्थापित करने की घोषणा की गई।
उर्वरक कीमतों पर मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महंगाई का बोझ किसानों पर नहीं डाला जाएगा। सरकार ने सब्सिडी के जरिए यूरिया और डीएपी की कीमतों को नियंत्रित रखा है।
नकली बीज और कीटनाशकों के खिलाफ सख्त कानून लाने की तैयारी भी जारी है। मंत्री ने कहा कि यह केवल फसल नहीं बल्कि स्वास्थ्य का भी मुद्दा है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार योजनाएं चला रही है।
कुल मिलाकर यह सम्मेलन न केवल आगामी खरीफ और रबी सीजन की रणनीति तय करेगा, बल्कि कृषि को लाभकारी, टिकाऊ और आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।