पौष पूर्णिमा पर उमड़ा आस्था का सैलाब: संगम में 31 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं की डुबकी, आगे क्या होगा?

Sat 03-Jan-2026,09:44 PM IST +05:30

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पौष पूर्णिमा पर उमड़ा आस्था का सैलाब: संगम में 31 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं की डुबकी, आगे क्या होगा? Paush Purnima Snan
  • पौष पूर्णिमा के साथ माघ मेले का विधिवत आगाज.

  • संगम व 10 घाटों पर 31 लाख से अधिक श्रद्धालुओं का स्नान.

  • कल्पवास, दान-पुण्य और दीपदान से गूंजा त्रिवेणी तट.

Uttar Pradesh / Prayagraj (Allahabad) :

Prayagraj / पौष पूर्णिमा के पावन अवसर के साथ ही शनिवार को त्रिवेणी तट पर माघ मेले का विधिवत शुभारंभ हो गया। भोर होते ही संगम नोज समेत कुल 10 प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया। मेला प्रशासन के अनुसार शाम तक 31 लाख से अधिक श्रद्धालु संगम में स्नान कर चुके थे, जिससे पूरा मेला क्षेत्र श्रद्धा, भक्ति और उत्साह से सराबोर नजर आया।

सुबह तड़के ही लाल सड़क, काली सड़क, त्रिवेणी मार्ग और अक्षयवट मार्ग से संगम की ओर जाने वाले रास्तों पर स्नानार्थियों का रेला चलने लगा। संगम नोज पर सूर्योदय के साथ ही पौष पूर्णिमा के स्नान का सिलसिला शुरू हो गया, जो देर रात तक चलता रहा। करीब 2.8 किलोमीटर लंबे संगम घाटों पर संतों, भक्तों, कल्पवासियों और आम श्रद्धालुओं ने क्रमबद्ध तरीके से स्नान किया। अन्य घाटों पर भी पूरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ बनी रही।

माघ मेले के साथ ही साधु-संतों और तीर्थपुरोहितों के शिविरों में भी धार्मिक गतिविधियां तेज हो गईं। कल्पवासी अपने-अपने शिविरों में जप, तप और ध्यान में लीन दिखे। संगम की रेती पर दान-पुण्य का विशेष दृश्य देखने को मिला। कहीं गरीबों और बेसहारों को अन्न-वस्त्र का दान किया जा रहा था, तो कहीं महिलाएं समूहों में मां गंगा के भजन और गीत गाते हुए वातावरण को भक्तिमय बना रही थीं। कुछ स्थानों पर श्रद्धालु एक-दूसरे को हल्दी-चंदन का टीका लगाकर आशीर्वाद दे रहे थे।

पुरोहितों की चौकियों पर तिलक और त्रिपुंड लगाने के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। सुरक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह मुस्तैद रही। सुरक्षा कर्मियों की कड़ी निगरानी के बीच जल पुलिस श्रद्धालुओं को रिवर बैरिकेडिंग के भीतर ही स्नान करने के लिए लगातार सचेत करती रही, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

त्रिवेणी संगम पर श्रद्धालुओं ने दुग्धाभिषेक किया और गंगा, यमुना व सरस्वती के नाम दीपदान कर अपनी आस्था प्रकट की। कई श्रद्धालु इस पावन क्षण को यादगार बनाने के लिए फोटो भी खिंचवाते नजर आए। पौष पूर्णिमा की डुबकी के साथ ही कल्पवास की शुरुआत हो गई। इस अवसर पर कल्पवासियों ने गणेश पूजन किया, तुलसी का बिरवा रोपा और गंगा की मिट्टी में जौ बोकर धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया। कुल मिलाकर माघ मेले का पहला स्नान पर्व श्रद्धा, अनुशासन और भक्ति के अद्भुत संगम के रूप में सामने आया।