केदारनाथ यात्रा 2026 हाईटेक सुरक्षा, ड्रोन-CCTV से कड़ी निगरानी

Sat 18-Apr-2026,04:57 PM IST +05:30

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केदारनाथ यात्रा 2026 हाईटेक सुरक्षा, ड्रोन-CCTV से कड़ी निगरानी Kedarnath-Yatra-2026-Hightech-Security
  • 300 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात, ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान, घोड़ा-खच्चरों पर बारकोड और चिप से निगरानी सुनिश्चित।

  • यात्रा मार्ग पर 14 एसओएस केंद्र बनाए गए, जहां नेटवर्क न होने पर भी यात्री सीधे कंट्रोल रूम से संपर्क कर तुरंत सहायता पा सकेंगे।

  • केदारनाथ यात्रा 2026 के लिए प्रशासन ने हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था लागू की, जिसमें ड्रोन, 200 सीसीटीवी कैमरे और एसओएस प्वाइंट शामिल हैं।

Uttarakhand / Haridwar :

केदारनाथ धाम की आगामी यात्रा को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाने के लिए इस बार प्रशासन ने हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। यात्रा मार्ग पर हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। प्रशासन का लक्ष्य है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और परेशानी मुक्त यात्रा अनुभव मिले, साथ ही किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

रुद्रप्रयाग से लेकर केदारनाथ धाम तक पूरे यात्रा मार्ग पर लगभग 200 हाई-रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे बाजारों, संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों, हेलीपैड और मुख्य मार्गों पर हर गतिविधि पर नजर रखेंगे। वहीं, गौरीकुंड से केदारनाथ तक पैदल मार्ग पर भी 16 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

यात्रा मार्ग पर 14 एसओएस प्वाइंट भी बनाए गए हैं, जिनमें गौरीकुंड, जंगलचट्टी, भीमबली, लिनचोली और रुद्रा प्वाइंट जैसे प्रमुख स्थान शामिल हैं। इन केंद्रों की खासियत यह है कि नेटवर्क न होने की स्थिति में भी यात्री सीधे जिला आपदा कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकते हैं और तत्काल सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

प्रशासन ने भीड़ और ट्रैफिक प्रबंधन को भी प्राथमिकता दी है। केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगे कैमरों के माध्यम से जाम की स्थिति पर नजर रखी जाएगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए 300 से अधिक पुलिसकर्मी गौरीकुंड, सोनप्रयाग और केदारनाथ धाम तक तैनात किए जाएंगे। ये जवान भीड़ नियंत्रण, कानून व्यवस्था और आपात स्थितियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहेंगे।

आधुनिक तकनीक के उपयोग के तहत 5 ड्रोन कैमरों से भी निगरानी की जाएगी। इसके अलावा यात्रा मार्ग पर संचालित लगभग 5 हजार घोड़ा-खच्चरों पर बारकोड और चिप लगाई जा रही है, जिससे उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी एनएस रजवार के अनुसार, कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय रहेगा और हर स्थिति पर नजर रखी जाएगी। इन व्यवस्थाओं से न केवल सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि बिछुड़ने वाले श्रद्धालुओं को जल्दी ढूंढने में भी मदद मिलेगी।