“डॉ. क्युट्रस” : शरीर, सेक्स और झिझक के बीच की खामोशी तोड़ती किताब
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Sexual Health Book
यौन स्वास्थ्य और शरीर से जुड़े मिथकों का तार्किक खंडन.
किशोरावस्था, हार्मोन और मानसिक झिझक पर सरल मार्गदर्शन.
आत्म-स्वीकृति, स्वच्छता और सही चिकित्सकीय सलाह पर ज़ोर.
Nagpur / “डॉ. क्युट्रस” केवल एक किताब नहीं, बल्कि उन अनकहे सवालों का जवाब है जिन्हें लोग मन में दबाकर रखते हैं। निजी अंगों, यौन स्वास्थ्य और शरीर की प्राकृतिक प्रक्रियाओं को लेकर समाज में जो झिझक, डर और भ्रम व्याप्त है, यह पुस्तक उसी पर सीधा प्रहार करती है। लेखक ने विषय को न तो सनसनीखेज बनाया है और न ही बोझिल वैज्ञानिक भाषा में उलझाया है, बल्कि इसे एक सुलभ, मित्रवत और तार्किक संवाद के रूप में प्रस्तुत किया है। किताब का मूल उद्देश्य पाठक को यह एहसास दिलाना है कि अपने शरीर को जानना शर्म की बात नहीं, बल्कि आत्म-स्वास्थ्य और आत्मसम्मान की पहली शर्त है।
इस पुस्तक में मानव शरीर की संरचना, प्रजनन प्रणाली और यौन स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को सरल भाषा में समझाया गया है। किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक बदलाव, हार्मोनल उतार-चढ़ाव, यौन जिज्ञासाएं और उनसे जुड़ी स्वाभाविक चिंताओं को लेखक सहजता से सामने लाते हैं। समाज में फैले मिथकों और अफवाहों को तोड़ते हुए किताब यह स्पष्ट करती है कि डर और अज्ञान अक्सर गलत निर्णयों और मानसिक तनाव को जन्म देते हैं। हास्य और व्यावहारिक उदाहरणों के सहारे कठिन विषय भी पाठक को सहज और स्वीकार्य लगते हैं, जिससे पढ़ते समय असहजता नहीं होती।
“डॉ. क्युट्रस” की एक बड़ी खासियत यह है कि यह केवल जानकारी नहीं देती, बल्कि सोच को बदलने की कोशिश करती है। पुस्तक यौन स्वच्छता, सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं, संक्रमण से बचाव और सही समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने के महत्व पर भी प्रकाश डालती है। साथ ही यह भी बताती है कि इंटरनेट और आधी-अधूरी जानकारियों पर भरोसा करना किस तरह नुकसानदायक हो सकता है। लेखक वैज्ञानिक तथ्यों और व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर पाठक को जिम्मेदार और जागरूक बनने की दिशा दिखाते हैं।
मानसिक और भावनात्मक दृष्टि से भी यह किताब महत्वपूर्ण है। शरीर को लेकर शर्म, अपराधबोध और डर व्यक्ति के आत्मविश्वास और रिश्तों को प्रभावित करते हैं। यह पुस्तक पाठक को अपने शरीर के प्रति सहज, सकारात्मक और सम्मानजनक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करती है। इस तरह “डॉ. क्यूट्स” न सिर्फ यौन शिक्षा की किताब है, बल्कि आत्म-स्वीकृति और स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ने का एक सार्थक प्रयास भी है, जो चुप्पी के बीच संवाद की जगह बनाती है।