रामकृष्ण परमहंस जयंती 2026: PM मोदी का नमन, 190वीं जयंती पर जानें जीवन, तिथि और शिक्षाएं

Thu 19-Feb-2026,09:42 PM IST +05:30

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रामकृष्ण परमहंस जयंती 2026: PM मोदी का नमन, 190वीं जयंती पर जानें जीवन, तिथि और शिक्षाएं Ramakrishna Paramhansa Jayanti 2026
  • 19 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी 190वीं जयंती.

  • PM मोदी ने आध्यात्म और सेवा के संदेश को याद किया.

  • सभी धर्मों की एकता और ईश्वर अनुभव पर जोर.

Delhi / Delhi :

Delhi / प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामकृष्ण परमहंस की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके आध्यात्म, ध्यान और मानव सेवा के संदेश को याद किया। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण परमहंस ने जिस तरह आध्यात्मिकता को जीवन की शक्ति के रूप में स्थापित किया, वह आने वाली पीढ़ियों को भी दिशा देता रहेगा। प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली में ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन’ के उद्घाटन के दौरान भी उनके उस विचार को दोहराया कि शिव भाव से मानव सेवा केवल साधना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का आधार है।

19 फरवरी 2026 को रामकृष्ण परमहंस की 190वीं जयंती मनाई जाएगी। वैदिक पंचांग के अनुसार उनका जन्म फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि, विक्रम संवत 1892 में हुआ था। इस वर्ष द्वितीया तिथि 18 फरवरी 2026 को शाम 4:57 बजे शुरू होकर 19 फरवरी 2026 को दोपहर 3:58 बजे समाप्त होगी। देशभर के रामकृष्ण मठों में यह पर्व श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाएगा।

रामकृष्ण परमहंस 19वीं सदी के भारत के महान आध्यात्मिक संतों में से एक थे। उनका जन्म एक साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में हुआ था। औपचारिक शिक्षा कम होने के बावजूद बचपन से ही उनका मन भक्ति और ध्यान में रमा रहता था। ईश्वर के साक्षात अनुभव की तीव्र इच्छा ने उन्हें विभिन्न धार्मिक मार्गों का अनुसरण करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने हिंदू धर्म के साथ-साथ इस्लाम और ईसाई धर्म की साधना भी की और निष्कर्ष निकाला कि सभी धर्म अंततः एक ही सत्य की ओर ले जाते हैं।

उनकी आध्यात्मिक साधना में भैरवी ब्राह्मणी का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने उन्हें तांत्रिक परंपरा में मार्गदर्शन दिया। बाद में वे स्वयं एक महान गुरु बने और अनेक शिष्यों को आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर किया। उनके प्रमुख शिष्यों में स्वामी विवेकानंद का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जिन्होंने गुरु के संदेश को विश्व मंच तक पहुंचाया।

रामकृष्ण परमहंस का मानना था कि केवल शास्त्रीय ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि ईश्वर का प्रत्यक्ष अनुभव ही सच्ची आध्यात्मिकता है। वे प्रेम, समर्पण और सेवा को साधना का मूल आधार मानते थे। उनका संदेश था कि मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य ईश्वर से एकत्व प्राप्त करना है, और इसके लिए करुणा, सहिष्णुता और सभी धर्मों के प्रति सम्मान आवश्यक है।

उनकी शिक्षाओं से प्रेरित होकर स्थापित ‘रामकृष्ण मिशन’ आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य और मानव सेवा के क्षेत्र में सक्रिय है। यह मिशन न केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन देता है, बल्कि समाज के जरूरतमंद वर्गों की सेवा भी करता है। आज भी भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में रामकृष्ण परमहंस के विचार लोगों को आत्मिक शांति, सद्भाव और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।