लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे नए उप सेना प्रमुख, 1 अप्रैल से संभालेंगे जिम्मेदारी

Fri 06-Mar-2026,08:49 PM IST +05:30

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लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे नए उप सेना प्रमुख, 1 अप्रैल से संभालेंगे जिम्मेदारी Dhiraj Seth Indian Army
  • लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ बने नए उप सेना प्रमुख.

  • 1 अप्रैल 2026 से सेना मुख्यालय में संभालेंगे पदभार.

  • दक्षिणी कमान के प्रमुख के रूप में रहा है अहम अनुभव.

Delhi / Delhi :

Delhi / भारतीय सेना में वरिष्ठ स्तर पर बड़े बदलाव के तहत लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। वर्तमान में वे भारतीय सेना की दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (GOC-in-C) के रूप में कार्यरत हैं, लेकिन अब वे 1 अप्रैल 2026 से नई दिल्ली स्थित सेना मुख्यालय में उप सेना प्रमुख का पदभार संभालेंगे। यह पद भारतीय सेना में सेना प्रमुख के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पद माना जाता है और इसमें कई रणनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियां शामिल होती हैं।

उप सेना प्रमुख के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ सेना की परिचालन तत्परता, आधुनिकीकरण की योजनाओं और रणनीतिक फैसलों में अहम भूमिका निभाएंगे। इस पद पर रहते हुए उन्हें देशभर में फैली विभिन्न सैन्य कमानों और इकाइयों के बीच समन्वय बनाए रखने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। इसके साथ ही सेना की दीर्घकालिक रणनीति, क्षमता विस्तार और नई सैन्य तकनीकों के एकीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी उनकी निगरानी रहेगी।

लेफ्टिनेंट जनरल सेठ अभी पुणे स्थित दक्षिणी कमान का नेतृत्व कर रहे हैं, जो भारतीय सेना की सबसे बड़ी भौगोलिक कमानों में से एक मानी जाती है। यह कमान पूरे प्रायद्वीपीय भारत में सैन्य संचालन, बुनियादी ढांचे के विकास और रणनीतिक तैयारियों की जिम्मेदारी संभालती है। उनके नेतृत्व में दक्षिणी कमान ने कई बड़े सैन्य अभ्यास आयोजित किए और सैन्य संसाधनों की तैयारी को मजबूत बनाने की दिशा में काम किया है। साथ ही जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय सुरक्षा अभियानों में भी इस कमान ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया है।

उनके कार्यकाल में दक्षिणी कमान के भीतर प्रशिक्षण मानकों को बेहतर बनाने और परिचालन क्षमता को मजबूत करने के लिए कई पहल की गईं। यही अनुभव अब उन्हें सेना मुख्यालय में नई भूमिका निभाने में मदद करेगा। सेना मुख्यालय में उनकी नियुक्ति उनके लंबे सैन्य करियर की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि यहां से देश की सैन्य रणनीति और बड़े फैसलों की दिशा तय होती है।

उप सेना प्रमुख की भूमिका केवल सैन्य संचालन तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें नीति क्रियान्वयन, संसाधन प्रबंधन और रक्षा मंत्रालय सहित अन्य सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय भी शामिल होता है। इस पद पर बैठे अधिकारी को सेना की विभिन्न शाखाओं, रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अन्य संस्थानों के साथ मिलकर काम करना पड़ता है, ताकि देश की सुरक्षा रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।

लेफ्टिनेंट जनरल सेठ की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारतीय सेना तेजी से आधुनिकीकरण और तकनीकी बदलावों की दिशा में आगे बढ़ रही है। सेना अपनी सीमाओं पर मजबूत सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ नई सैन्य तकनीकों को भी तेजी से अपनाने की कोशिश कर रही है। भारत को पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान और उत्तरी तथा पूर्वी सीमाओं पर चीन से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, ऐसे में सेना के शीर्ष स्तर पर अनुभवी नेतृत्व बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लेफ्टिनेंट जनरल सेठ का क्षेत्रीय कमान का अनुभव सेना मुख्यालय के लिए काफी उपयोगी साबित होगा। इससे सेना की रणनीतिक योजना और परिचालन समन्वय को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। भारतीय सेना में वरिष्ठ अधिकारियों को समय-समय पर क्षेत्रीय कमानों और सेना मुख्यालय के महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त करने की परंपरा रही है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि शीर्ष नेतृत्व के पास मैदान के अनुभव के साथ-साथ रणनीतिक दृष्टि भी हो।

कुल मिलाकर लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ की यह नियुक्ति भारतीय सेना के नेतृत्व ढांचे को और मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।