विजय त्रिवेदी की पुस्तक में अटल बिहारी वाजपेयी के विचार और राजनीतिक विरासत
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विजय त्रिवेदी की नई पुस्तक में अटल बिहारी वाजपेयी के विचार, नेतृत्व और राजनीतिक विरासत का जीवंत चित्रण, संगमनीप्रभा पत्रिका का लोकार्पण।
दिल्ली/ भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के विचार, व्यक्तित्व और राजनीतिक विरासत पर केंद्रित वरिष्ठ पत्रकार-लेखक विजय त्रिवेदी की नई पुस्तक का औपचारिक विमोचन राजधानी में एक साहित्यिक समारोह के दौरान किया गया। इसी अवसर पर प्रकाशन विभाग की नई संस्कृत-हिंदी द्विभाषी त्रैमासिक पत्रिका ‘हिन्दी संगमनीप्रभा’ का भी लोकार्पण हुआ। यह आयोजन अटल जी की वैचारिक विरासत और भारतीय भाषायी परंपरा के संवर्धन का सशक्त मंच बना।
भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के बहुआयामी व्यक्तित्व, दूरदर्शी नेतृत्व और राष्ट्रनिर्माण में उनके योगदान को केंद्र में रखकर वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक श्री विजय त्रिवेदी की नवीन पुस्तक का आज औपचारिक विमोचन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने अटल बिहारी वाजपेयी को भारतीय राजनीति का नैतिक स्तंभ बताते हुए कहा कि यह पुस्तक उनके जीवन, विचारों और निर्णयों का प्रेरक व प्रामाणिक दस्तावेज है।
पुस्तक में अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन और कार्यों को 12 अध्यायों में क्रमबद्ध, तथ्यपरक और संवेदनशील शैली में प्रस्तुत किया गया है। इसमें उनके प्रारम्भिक जीवन, स्वयंसेवक के रूप में सार्वजनिक जीवन में प्रवेश, राष्ट्रीय नेता बनने की यात्रा, आपातकाल का दौर, कारगिल युद्ध के समय नेतृत्व, परमाणु परीक्षण, आर्थिक उदारीकरण, नई टेलीकॉम नीति, पाकिस्तान से मैत्री की पहल, भाषा-प्रेम, कवि-मन, राजनीति से संन्यास और महाप्रयाण तक के सभी प्रमुख पड़ावों का विस्तार से वर्णन है। लेखक ने घटनाओं के साथ-साथ अटल जी के मानवीय पक्ष, संवाद-कौशल और सर्वसमावेशी सोच को भी उभारने का प्रयास किया है।
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि विजय त्रिवेदी की सरल, सहज और प्रभावशाली लेखन-शैली पाठकों को अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों से गहराई से जोड़ती है। यह पुस्तक विशेष रूप से नई पीढ़ी के लिए उपयोगी है, जो भारतीय राजनीति और लोकतांत्रिक मूल्यों को समझना चाहती है। लगभग चार दशकों के पत्रकारिता अनुभव के साथ विजय त्रिवेदी टेलीविजन और साहित्य जगत का जाना-पहचाना नाम हैं। वे इससे पूर्व ‘हार नहीं मानूँगा’, ‘यदा यदा ही योगी’, ‘बीजेपी: कल, आज और कल’ तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर केंद्रित ‘संघम् शरणं गच्छामि’ जैसी चर्चित पुस्तकों के लेखक रहे हैं।
इसी कार्यक्रम में प्रकाशन विभाग की नई संस्कृत-हिंदी द्विभाषी त्रैमासिक पत्रिका ‘संगमनीप्रभा’ के प्रथम अंक का लोकार्पण दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो. ओम नाथ बिमली द्वारा किया गया। यह पत्रिका प्रकाशन विभाग की पहली त्रैमासिक द्विभाषी पहल है, जिसमें मूल सामग्री संस्कृत में और प्रत्येक पृष्ठ पर उसका हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किया गया है। इसका उद्देश्य संस्कृत वाङ्मय की समृद्ध ज्ञान-परंपरा को नई पीढ़ी तक सरल रूप में पहुँचाना है।
प्रो. बिमली ने पत्रिका की विषय-वस्तु और डिज़ाइन की सराहना करते हुए कहा कि ‘संगमनीप्रभा’ प्रकाशन विभाग की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं की शृंखला को और सशक्त करेगी। पत्रिका का मूल्य 25 रुपये और वार्षिक सदस्यता 100 रुपये निर्धारित की गई है। समारोह में लेखक विजय त्रिवेदी, प्रकाशन विभाग के प्रधान महानिदेशक श्री भूपेन्द्र कैन्थोला सहित अनेक साहित्यकार और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।