संत गाडगे महाराज की 150वीं जयंती पर राष्ट्रीय संगोष्ठी: स्वच्छता, शिक्षा और स्वरोजगार के संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प

Tue 24-Feb-2026,04:03 PM IST +05:30

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संत गाडगे महाराज की 150वीं जयंती पर राष्ट्रीय संगोष्ठी: स्वच्छता, शिक्षा और स्वरोजगार के संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प Sant Gadge Maharaj Jayanti
  • संत गाडगे महाराज की 150वीं जयंती पर राष्ट्रीय संगोष्ठी.

  • स्वच्छता, शिक्षा और सामाजिक न्याय पर विस्तृत चर्चा.

  • पुस्तक विमोचन व सामाजिक कार्यकर्ताओं का सम्मान.

Uttar Pradesh / Prayagraj (Allahabad) :

Prayagraj / गाडगे भवन प्रीतम नगर इलाहाबाद/प्रयागराज में वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन फॉर रिसर्च एण्ड डेवलपमेंट ऑफ धोबिस (WORDD)  कौशाम्बी के तत्वावधान में संत गाडगे महाराज की 150वीं जयंती के अवसर पर “संत गाडगे का व्यक्तित्व, कृतित्व, दर्शन एवं सामाजिक आंदोलन” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संत गाडगे महाराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। संगोष्ठी में अतिथियों को बैज लगाकर, राष्ट्र संत गाडगे महाराज का छायाचित्र एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर स्वागत किया गया।

गाडगे महाराज जी की 150वीं जयन्ती की पूर्व संध्या पर आयोजित इस संगोष्ठी का उद्देश्य गाडगे महाराज के सामाजिक सुधार, स्वच्छता, शिक्षा और जनजागरण से जुड़े विचारों को वर्तमान समाज में पुनर्स्थापित करना था। आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों, चिकित्सकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों,  शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सक्रिय सहभागिता रही।

कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के सेवानिवृत्त सीनियर कमांडेंट एम. के. वर्मा ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज के सर्जरी विभाग के प्रो. राजकुमार चौधरी उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉ. राममिलन चौधरी ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। मुख्य अतिथि प्रो. चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि संत गाडगे महाराज का जीवन समाज सेवा, समानता और जनकल्याण की अनुपम मिसाल है। उन्होंने स्वच्छता और शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बनाया, जिससे समाज में व्यापक जागरूकता आई।

विशिष्ट अतिथि डॉ. राममिलन चौधरी ने कहा कि स्वच्छता और शिक्षा को व्यवहार में अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।लोहिया वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राम करन निर्मल ने संत गाडगे महाराज के मानव कल्याण, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता जैसे कार्यों को प्रेरणास्रोत बताते हुए उनके विचारों को अपनाने का आह्वान किया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में एम. के. वर्मा ने कहा कि संत गाडगे महाराज के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके जीवनकाल में थे। उन्होंने सामाजिक समरसता, जागरूकता और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने में उनके योगदान को ऐतिहासिक बताया। 

इस अवसर पर अतिथियों द्वारा के. राजन्ना द्वारा लिखित आत्मकथात्मक उपन्यास फांसी के अंग्रेजी संस्करण  “The Hanging Noose” (अनुवादक गण डॉ. चंदूरी कामेश्वरी एवं सुश्री पद्मा अजय भार्गव) का विमोचन तथा लोकप्रिय त्रैमासिक पत्रिका “रजक चेतना" द्वारा प्रकाशित कैलेंडर 2026 का लोकार्पण भी किया गया।

संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों में वक्ताओं ने संत गाडगे महाराज के सामाजिक आंदोलन और उनके विचारों की वर्तमान संदर्भ में उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की। संस्था के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र दिवाकर और ममता दिवाकर ने सामाजिक संगठन और जनजागरण के महत्व पर प्रकाश डाला। वक्ता डॉ. धर्मेन्द्र चौधरी ने कहा कि संत गाडगे महाराज ने समाज की कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष कर सामाजिक चेतना का नया मार्ग प्रशस्त किया। संस्था के सचिव प्रवीण दिवाकर ने बताया कि WORDD की शुरुआत मात्र दस लोगों से हुई थी, लेकिन आज यह एक मजबूत सामाजिक संगठन के रूप में स्थापित होकर समाज सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

संगोष्ठी के दौरान सामाजिक एकता, महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी गंभीर विमर्श हुआ। वक्ताओं ने समाज में एकता और सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया, जबकि ममता दिवाकर ने  महिला सशक्तिकरण को सामाजिक विकास का मूल आधार बताते हुए महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

वक्ता सत्येन्द्र चौधरी ने संत गाडगे महाराज के सामाजिक सुधार कार्यों को आज भी प्रेरणादायक बताया और उनके विचारों को समाज के लिए मार्गदर्शक बताया।

इस अवसर पर लखीमपुर खीरी के युवा उद्यमी सुधीर कुमार ने जोखिम का साहस और स्वरोजगार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में युवाओं के लिए स्वरोजगार ही आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं और कौशल विकास कार्यक्रमों का लाभ उठाकर युवा छोटे-छोटे उद्यम स्थापित कर सकते हैं। स्वरोजगार न केवल व्यक्ति को आर्थिक रूप से सशक्त बनाता है, बल्कि समाज के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।

समापन सत्र में आकाशवाणी से सेवानिवृत्त बोलता प्रसाद ने डॉ. भीमराव आंबेडकर और संत गाडगे महाराज के विचारों को स्मरण करते हुए कहा कि संत गाडगे महाराज औपचारिक शिक्षा से वंचित होने के बावजूद ज्ञान और सामाजिक दृष्टिकोण में अद्वितीय थे।  
ईश्वरी प्रसाद चौधरी ने सामाजिक न्याय और बहुजन चेतना की आवश्यकता पर बल दिया।

सुरेन्द्र चौधरी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि संत गाडगे महाराज के बताए हुए रास्ते का अनुसरण कर हमें अपने बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा देने के लिए हरसंभव प्रयत्न करना चाहिए और उन्हें अनुशासन में रखना चाहिए जिससे वे आगे चलकर एक सशक्त और अनुशासित नागरिक बन सकें।

इसके अतिरिक्त अन्य कई वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए।

संगोष्ठी के अंतिम सत्र में विभिन्न वक्ताओं ने अपने शोध और विचार प्रस्तुत किए। रामचंद्र ने “भारतीय कीर्तन परंपरा एवं संत गाडगे महाराज का सामाजिक सरोकार” विषय पर उनके कीर्तन के दार्शनिक पहलू और सामाजिक योगदान का विश्लेषण किया। विनोद भास्कर ने संस्था के इतिहास और सामाजिक कार्यों की विस्तार से जानकारी दी। ममता दिवाकर ने “डेबू से गाडगे बनने में माता और पत्नी का सहयोग” विषय पर उनके जीवन के पारिवारिक और मानवीय पक्ष को रेखांकित कर महिला सशक्तिकरण को सामाजिक विकास का मूल आधार बताते हुए समाज में प्रत्येक स्तर पर महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

डॉ. संदीप कुमार ने “भारतीय ज्ञान परंपरा और संत गाडगे बाबा” विषय पर उनके विचारों की दार्शनिक प्रासंगिकता बताई। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के शोधार्थी शरद कुमार ने “संत गाडगे बाबा: शिक्षा में योगदान और सामाजिक परिवर्तन” विषय पर उनके शैक्षिक योगदान की गंभीर चर्चा की, जबकि डॉ. नरेन्द्र दिवाकर ने “महान समाज सुधारक निष्काम कर्मयोगी संत गाडगे महाराज और समाज कार्य” विषय पर अपनी बात रखते हुए उनके जीवन और कार्यों को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया। डॉ. धर्मेन्द्र चौधरी ने संत गाडगे महाराज और सामाजिक न्याय विषय पर अपनी बात रखी। कार्यक्रम के अध्यक्ष एम. के. वर्मा ने संगोष्ठी को अत्यंत सफल बताते हुए सभी प्रतिभागियों और आयोजकों की सराहना की तथा संत गाडगे महाराज के विचारों को समाज में आगे बढ़ाने का सामूहिक संकल्प लिया। 
कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ नागरिकों  मानसिंह, राजेश चौधरी, बोलता प्रसाद दिवाकर, ईश्वरी प्रसाद, राधेश्याम दिवाकर, ओम प्रकाश और शोधपत्र प्रस्तुत करने वाले डॉ. सत्येन्द्र चौधरी, शरद कनौजिया और मुकेश निर्मल को संस्था द्वारा स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया। 
कार्यक्रम का संचालन डॉ. धर्मेन्द्र चौधरी एवं डॉ. संदीप दिवाकर ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नरेन्द्र दिवाकर ने किया।

इस अवसर पर संस्था के पदाधिकारियों और सदस्यों एम के वर्मा, डॉ. नरेन्द्र दिवाकर, डॉ. संदीप दिवाकर, प्रवीण दिवाकर, आरती भास्कर, आशुतोष दिवाकर, रामचन्द्र, राहुल दिवाकर व तमाम गणमान्य नागरिक सहित शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी, डॉ. विजय कनौजिया, रामसरन, शिवमूरत,  विनोद रजक, अमरदीप पिंटू दिवाकर, रमेश कनौजिया एडवोकेट, सुरेन्द्र चौधरी एडवोकेट, विनय विक्रम राजे एडवोकेट, मंजू चौधरी, आशाराम, राजेन्द्र श्रीवास, बृजेन्द्र बहादुर, रामहर्ष वर्मा एडवोकेट, संतोष चौधरी, अनिल कुमार, दीपक, पुष्पेन्द्र, अरविन्द, अभिषेक, अरुण, सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

रिपोर्ट: सुधीर कुमार

डॉ. नरेन्द्र दिवाकर
मो. 9839675023