राष्ट्रपति मुर्मू के बंगाल दौरे पर विवाद, पीएम मोदी बोले- यह राष्ट्रपति का अपमान है

Sat 07-Mar-2026,09:03 PM IST +05:30

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राष्ट्रपति मुर्मू के बंगाल दौरे पर विवाद, पीएम मोदी बोले- यह राष्ट्रपति का अपमान है PM Modi Statement Bengal
  • राष्ट्रपति मुर्मू के बंगाल दौरे पर प्रोटोकॉल विवाद.

  • पीएम मोदी और निर्मला सीतारमण ने ममता सरकार पर साधा निशाना.

  • टीएमसी और बीजेपी के बीच तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी.

Delhi / Delhi :

Delhi / पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हालिया दौरे को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। राष्ट्रपति के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल का पालन नहीं होने के आरोपों के बाद राज्य की ममता बनर्जी सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है। इस मुद्दे पर अब तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच तीखी बयानबाज़ी भी शुरू हो गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे राष्ट्रपति पद का अपमान बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह घटना बेहद शर्मनाक है और इससे लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले हर व्यक्ति को निराशा हुई है। प्रधानमंत्री ने लिखा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आदिवासी समुदाय से आती हैं और उन्होंने जो पीड़ा व्यक्त की है, वह पूरे देश के लिए दुखद है। उनके अनुसार पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार ने इस मामले में सारी सीमाएं पार कर दी हैं और राष्ट्रपति के अपमान के लिए राज्य का प्रशासन जिम्मेदार है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर होता है और इस पद की गरिमा का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि पश्चिम बंगाल सरकार और तृणमूल कांग्रेस इस मामले में समझदारी से काम लेगी और भविष्य में ऐसे हालात नहीं बनने दिए जाएंगे।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि राष्ट्रपति का बयान दर्द से भरा हुआ है और ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। उनके अनुसार राष्ट्रपति के संवैधानिक पद के अनुरूप हर प्रोटोकॉल का पालन होना चाहिए था और कार्यक्रम से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं की जानकारी उन्हें दी जानी चाहिए थी। उन्होंने इसे भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान बताया।

दरअसल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को पश्चिम बंगाल के दौरे पर थीं। इस दौरान उन्होंने सिलीगुड़ी के पास बिधाननगर में आदिवासी समुदाय के एक कार्यक्रम को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपनी “छोटी बहन” बताते हुए यह भी कहा कि उन्हें आश्चर्य हुआ कि उनके उत्तर बंगाल दौरे के दौरान मुख्यमंत्री या राज्य सरकार का कोई मंत्री उनका स्वागत करने के लिए मौजूद नहीं था।

राष्ट्रपति ने यह भी सवाल उठाया कि आदिवासी समुदाय के वार्षिक कार्यक्रम का स्थान बिधाननगर से बदलकर गोशाईपुर क्यों किया गया। उन्होंने कहा कि बिधाननगर में पर्याप्त जगह थी, जहां बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में शामिल हो सकते थे। लेकिन राज्य प्रशासन ने वहां कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी और उसे ऐसी जगह स्थानांतरित कर दिया गया जहां लोगों के लिए पहुंचना मुश्किल था।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जिस स्थान पर कार्यक्रम आयोजित किया गया, वहां लोगों के आने-जाने में दिक्कत हो रही है। इससे यह सवाल उठता है कि प्रशासन ने इस कार्यक्रम के आयोजन को लेकर ऐसा फैसला क्यों लिया।

राष्ट्रपति के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। बीजेपी ने इसे राष्ट्रपति का अपमान बताते हुए राज्य सरकार पर हमला तेज कर दिया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

कुल मिलाकर राष्ट्रपति के दौरे से जुड़ा यह विवाद अब राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर और बयानबाज़ी होने की संभावना जताई जा रही है।