लक्षद्वीप में समुद्री पानी बना पेयजल

Sat 07-Mar-2026,05:39 PM IST +05:30

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  • लक्षद्वीप के कवरत्ती द्वीप में एलटीटीडी तकनीक से समुद्री खारे पानी को मीठे पेयजल में बदलकर स्थानीय लोगों की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या दूर की जा रही है।

  • इस परियोजना से न केवल पेयजल उपलब्धता बढ़ी है बल्कि भविष्य में ओटीईसी तकनीक से स्वच्छ ऊर्जा और अतिरिक्त मीठे पानी का उत्पादन भी संभव होगा।

Delhi / Delhi :

Delhi/ लक्षद्वीप के कवरत्ती द्वीप में पेयजल की समस्या को दूर करने के लिए स्थापित निम्न तापमान तापीय विलवणीकरण (एलटीटीडी) संयंत्र से स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिल रही है। केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को इस संयंत्र का दौरा कर इसकी कार्यप्रणाली और प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान स्थानीय निवासियों ने मंत्री से बातचीत करते हुए बताया कि इस परियोजना ने द्वीप में पानी की पुरानी समस्या को काफी हद तक समाप्त कर दिया है।

कवरत्ती निवासी अब्दुल रहमान ने केंद्रीय मंत्री से बातचीत करते हुए कहा कि पहले उन्हें अपने घरों के पास स्थित छोटे-छोटे कुओं के खारे पानी पर निर्भर रहना पड़ता था। यह पानी अक्सर पीने योग्य नहीं होता था और लोगों को रोजाना पानी की व्यवस्था करने में काफी कठिनाई होती थी। उन्होंने बताया कि अब खारे समुद्री पानी को मीठा बनाने वाले संयंत्र के चालू होने के बाद नलों के जरिए साफ पेयजल आसानी से उपलब्ध हो रहा है।

एक अन्य स्थानीय निवासी वलिया बी ने बताया कि पहले उन्हें दिन में कई बार कुओं से पानी लाकर घर तक पहुंचाना पड़ता था, जो बेहद कठिन काम था। उन्होंने कहा कि अब यह समस्या खत्म हो गई है और पानी सीधे घरों तक पहुंच रहा है।

मंत्री के साथ आए अधिकारियों ने बताया कि एलटीटीडी तकनीक समुद्री जल के तापमान में अंतर का उपयोग करती है। इसमें गर्म सतही समुद्री जल और गहरे समुद्र के ठंडे पानी के बीच तापमान अंतर के माध्यम से समुद्री जल को पीने योग्य पानी में परिवर्तित किया जाता है। यह तकनीक विशेष रूप से द्वीपीय क्षेत्रों के लिए उपयोगी मानी जाती है, जहां मीठे पानी के प्राकृतिक स्रोत सीमित होते हैं।

अधिकारियों ने बताया कि लक्षद्वीप के कई द्वीपों में ऐसे संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे स्थानीय समुदायों को स्थायी पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कवरत्ती में शुरू हुई यह पहल धीरे-धीरे अन्य द्वीपों तक भी विस्तार कर रही है।

इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने आगामी महासागर तापीय ऊर्जा रूपांतरण (ओटीईसी) परियोजना की प्रगति की भी समीक्षा की। इस परियोजना से भविष्य में स्वच्छ बिजली के साथ-साथ ताजे पानी का उत्पादन भी संभव हो सकेगा।

उन्होंने कहा कि इस तरह की तकनीकें उन क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी हैं जहां समुद्री जल तो प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, लेकिन मीठे पानी की कमी रहती है। ऐसी परियोजनाएं डीजल आधारित ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भरता को भी कम कर सकती हैं, जो अक्सर मौसम और परिवहन से जुड़ी चुनौतियों के कारण प्रभावित होती है।

लक्षद्वीप में लंबे समय से खारे पानी की समस्या, सीमित भूजल और वर्षा पर निर्भरता के कारण पेयजल उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती रहा है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले वर्षों में विलवणीकरण संयंत्र द्वीपों में स्थायी और भरोसेमंद पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।