कोयला नीलामी का 15वां दौर शुरू, ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा नया बल

Thu 16-Apr-2026,01:03 PM IST +05:30

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कोयला नीलामी का 15वां दौर शुरू, ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा नया बल India-Coal-Auction-15th-Round-Energy-Security
  • कोयला मंत्रालय 17 अप्रैल 2026 को वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी के 15वें दौर की शुरुआत करेगा, जिससे ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ने की उम्मीद है।

  • सरकार का लक्ष्य घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करना और आत्मनिर्भर भारत के विजन को मजबूत करना है।

Delhi / New Delhi :

DELHI/ भारत की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कोयला मंत्रालय लगातार आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इसी क्रम में 17 अप्रैल 2026 को वाणिज्यिक कोयला खदानों की नीलामी के 15वें दौर का शुभारंभ किया जाएगा। इस आयोजन के साथ “आत्मनिर्भर भारत: ऊर्जा सुरक्षा के लिए कोयला” विषय पर एक महत्वपूर्ण परामर्श बैठक भी आयोजित की जाएगी।

मुंबई में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस बैठक में उद्योग विशेषज्ञ, निवेशक और अन्य हितधारक भाग लेंगे, जहां ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करने और निवेश बढ़ाने पर चर्चा होगी।

वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू हुई वाणिज्यिक कोयला खनन नीति ने देश के ऊर्जा परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव लाए हैं। इस पहल के तहत कोयले की घरेलू उपलब्धता में वृद्धि हुई है, जिससे आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है।

आगामी 15वें चरण में सरकार पूरी तरह और आंशिक रूप से खोजे गए कोयला ब्लॉकों को नीलामी के लिए प्रस्तुत करेगी। इसका उद्देश्य न केवल अनुभवी कंपनियों, बल्कि नए निवेशकों और तकनीकी उद्यमों को भी आकर्षित करना है। इससे कोयला क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और एक मजबूत इकोसिस्टम विकसित होगा।

नीलामी प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सरकार ने कई सुधार किए हैं। इससे उद्योग जगत को समान अवसर मिल रहे हैं और कोयला उत्पादन में भी तेजी आई है। यह पहल रोजगार सृजन और क्षेत्रीय विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौर में आने वाले निवेश से कोयला क्षेत्र को नई गति मिलेगी। साथ ही, यह देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कोयला मंत्रालय का लक्ष्य है कि देश को सस्ती, विश्वसनीय और सतत ऊर्जा उपलब्ध कराई जाए।

यह पहल न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के विजन को भी आगे बढ़ाएगी। आने वाले समय में यह नीति भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में और अधिक सशक्त बनाने में सहायक साबित हो सकती है।