मनी लॉन्ड्रिंग पर शिकंजा, FIU-IND और PFRDA के बीच हुआ अहम समझौता
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एफआईयू-आईएनडी और पीएफआरडीए के बीच MoU से मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद वित्तपोषण के खिलाफ सूचना साझा करने और निगरानी तंत्र को मजबूती मिलेगी।
त्रैमासिक बैठकों और नोडल अधिकारियों की नियुक्ति से दोनों एजेंसियों के बीच समन्वय और प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित होगा।
समझौते के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम, जोखिम मूल्यांकन और संदिग्ध लेनदेन की पहचान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
Delhi/ वित्तीय पारदर्शिता और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए एफआईयू-आईएनडी और पीएफआरडीए के बीच हुए इस समझौते को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस MoU के तहत दोनों संस्थाएं सूचना साझा करने, जोखिम विश्लेषण और निगरानी तंत्र को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करेंगी।
समझौते पर एफआईयू-आईएनडी के निदेशक अमित मोहन गोविल और पीएफआरडीए के पूर्णकालिक सदस्य रणदीप सिंह जगपाल ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर पीएफआरडीए के अध्यक्ष शिवसुब्रमणियन रामन भी उपस्थित रहे।
इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने के लिए संस्थागत क्षमता को बढ़ाना है। इसके तहत प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि पीएफआरडीए द्वारा विनियमित संस्थाएं एएमएल/सीएफटी मानकों का बेहतर तरीके से पालन कर सकें।
दोनों एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप काम करते हुए सूचनाओं का आदान-प्रदान करेंगी और पारस्परिक हित के मुद्दों पर नियमित रूप से विचार-विमर्श करेंगी। इसके लिए त्रैमासिक बैठकें आयोजित करने का भी प्रावधान किया गया है।
समझौते के तहत प्रत्येक संस्था एक नोडल अधिकारी नियुक्त करेगी, जो दोनों एजेंसियों के बीच समन्वय को सुचारू बनाए रखेगा। इसके अलावा, यह सहयोग विदेशी वित्तीय खुफिया इकाइयों के साथ सूचना साझा करने में भी सहायक होगा।
इस पहल के अंतर्गत संदिग्ध लेनदेन की पहचान, जोखिम मूल्यांकन और रिपोर्टिंग संस्थाओं द्वारा अनुपालन की निगरानी भी शामिल होगी। यह कदम पीएमएलए और अन्य संबंधित नियमों के प्रभावी कार्यान्वयन में मदद करेगा।
एफआईयू-आईएनडी एक केंद्रीय एजेंसी के रूप में वित्तीय लेनदेन की निगरानी और विश्लेषण करती है, जबकि पीएफआरडीए पेंशन क्षेत्र के नियमन और विकास के लिए जिम्मेदार है। इस सहयोग से पेंशन इकोसिस्टम में पारदर्शिता और सुरक्षा को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।