MPमें भीषण गर्मी का असर, सागर-अनूपपुर में 5वीं तक स्कूल बंद
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मध्य प्रदेश के सागर और अनूपपुर जिलों में बढ़ते तापमान को देखते हुए कक्षा 5वीं तक के स्कूलों में अवकाश घोषित कर बच्चों को राहत दी गई।
प्रशासन ने गर्मी के खतरे को देखते हुए स्कूल समय में बदलाव किया, जबकि उच्च कक्षाओं के लिए सीमित समय में पढ़ाई जारी रखने का निर्देश दिया।
हीट वेव के बढ़ते असर के बीच स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने अभिभावकों को बच्चों की देखभाल और सावधानी बरतने की सलाह दी।
Anuppur/ मध्य प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार बढ़ते तापमान के कारण लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अहम निर्णय लिया है। सागर और अनूपपुर जिलों में कलेक्टरों ने कक्षा 5वीं तक के स्कूलों में अवकाश घोषित कर राहत देने का कदम उठाया है।
सागर में कलेक्टर प्रतिभा पाल ने गर्मी के प्रकोप को देखते हुए 23 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक प्री-प्राइमरी से कक्षा 5वीं तक के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया है। यह आदेश शासकीय, अशासकीय, केंद्रीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय, ICSE और CBSE सहित सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों पर लागू होगा। प्रशासन का मानना है कि छोटे बच्चों पर गर्मी का प्रभाव अधिक पड़ता है, इसलिए यह निर्णय आवश्यक था।
हालांकि, कक्षा 6वीं से 12वीं तक की कक्षाओं का संचालन जारी रहेगा, लेकिन समय में बदलाव किया गया है। इन कक्षाओं को सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक संचालित किया जाएगा। साथ ही शिक्षकों को विद्यालय में उपस्थित रहकर शैक्षणिक कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। पूर्व निर्धारित परीक्षाएं और अन्य गतिविधियां तय समय के अनुसार ही होंगी।
इसी तरह अनूपपुर में भी कलेक्टर हर्षल पंचोली ने 22 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक कक्षा 5वीं तक के सभी स्कूलों को बंद रखने का आदेश जारी किया है। यहां भी आदेश सभी प्रकार के स्कूलों पर समान रूप से लागू किया गया है।
गर्मी के कारण अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और अन्य समस्याओं के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। प्रशासन ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे बच्चों को दोपहर के समय घर से बाहर न निकलने दें और पर्याप्त पानी व ठंडे पेय पदार्थों का सेवन कराएं।
यह फैसला बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिससे उन्हें भीषण गर्मी के दुष्प्रभाव से बचाया जा सके।